Nitipath

jammu kashmir terrorist attack

jammu kashmir terrorist attack में अभी तक 7 की मौत , 5 घायल

jammu kashmir terrorist attack में अभी तक 7 की मौत , 5 घायल jammu and kashmir में एक बार फिर घाटियों में  आंतकी हमला। अब इस बार jammu and kashmir  के गांदरबल जिले में एक सुरंग प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 7 कामगारों की जान गई है। यह हमला गांदरबल के सोनमर्ग के पास रविवार की शाम को हुआ। इस हादसे में अभी तक एक डाँक्टर समेत 6 वर्करों की मौत हो गई है जबकि 5 अन्य लोग घायल है । यह घटना उस वक्त हुई, जब गांदरबल के गुंड इलाके में  टनल परियोजना पर काम कर रहे मजदूर और अन्य वर्कर अपना काम खत्म कर शिविर में लौट रहे थे। यह शिविर घनें जंगलों में बना हुआ था। आधिकारी की माने तो, यह क्षेत्र लंबे समय से आंतकवादी गतिविधियों से दूर था औऱ यह घाटी में पहला इतना बडा परियोजना कार्य श्रामिको पर हमला है। उन्होनें बताया कि मुख्यता दो आंतकवादी थे , जिन्होनें अंधाधुंघ गोलिया चलिए जिसमें स्थानिय और बाहरी कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडा। गोलियां इतनी अंधाधुंध थी की मौके पर मौजूद गाडी में  भी आग लग गई। jammu kashmir terrorist attack पर TRF संगठन ने किया आंतकी हमला jammu kashmir terrorist attack – सूत्रों की माने तो यह हमला TRF संगठन के माध्यम से किया गया है। इस आंतकी हमले में गुरमीत सिंह गुरदासपुर पंजाब से  डॉ. शाहनवाज निवासी बडगाम से मोहम्मद हनीफ बिहार से अनिल कुमार शुक्ला,   मध्य प्रदेश से  फहीम नासिर बिहार से कलीम बिहार से ,  शशि अबरोल, जम्मू की मौत हो गई है । आमित शाह ने कहा कि इसका जवाब हमारी सुरक्षा सेना देगी jammu kashmir terrorist attack के गांदरबल जिले में हुए इस हमले के बाद गह मंत्री आमित शाह ने आंतक वादी हमले की निंदा की है । उन्होनें अपने एक्स अकांउट पर लिखा की इस हरकत को अंजाम देने वालों को बक्शा नही जाएगा। शाह ने कहा कि आंतकियों को इसका जवाब जरुर मिलेगा । आपको बता दें कि ये सरकार बनने के बाद ये पहला आंतकी हमला है ।     – khushi sharma
Read more
अनुच्छेद 370 : सीएम योगी का सियासी प्रहार

जम्मू-कश्मीर में सीएम योगी का सियासी प्रहार: अनुच्छेद 370, POK और विपक्ष पर तीखे बयान

अनुच्छेद 370, POK और विपक्ष पर तीखे बयान – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जम्मू-कश्मीर दौरे और वहां की रामगढ़ रैली में दिए गए बयानों के बारे में।गुरुवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे सीएम योगी ने कहा कि जो लोग भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करते थे, उनका जवाब जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव देंगे। उन्होंने बताया कि भारी संख्या में मतदाता मतदान कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि लोग परिवारवादी और विभाजनकारी राजनीति को तिलांजलि दे चुके हैं। योगी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग लोकतांत्रिक सरकार की चाह रखते हैं और विकास की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि POK authorized कश्मीर फिर से जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बनेगा।CM ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी अलग झंडे का Support करते हैं और क्या वे नेशनल कॉन्फ्रेंस की अनुच्छेद 370 और 35A को वापस लाने की मांग का Support करते हैं। CM योगी आदित्यनाथ का जम्मू-कश्मीर में शक्तिशाली भाषण: अनुच्छेद 370, अलगाववादी राजनीति और कांग्रेस पर जोरदार हमला उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि इन दलों ने जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद का ‘वेयरहाउस’ बना दिया था।योगी ने कहा कि कांग्रेस, PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद की नर्सरी समाप्त हो गई है और पत्थरबाजी की घटनाएं कम हो गई हैं।योगी ने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार किया है। उन्होंने कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी को ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों’ की संज्ञा दी, जो आम जनता का शोषण करती हैं।CM ने नागरिकता संशोधन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि केवल बीजेपी ही कश्मीरी पंडितों के साथ खड़ी थी। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि सभी दल इसका विरोध करते हैं, जबकि BJP समाधान का नाम है।योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने एक बार फिर से राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर हमारी नजर बनी रहेगी। ऐसे ही और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए नीतिपथ के साथ। धन्यवाद! –Pooja Mishra
Read more
Yogi आदित्यनाथ

Yogi आदित्यनाथ का जम्मू-कश्मीर में चुनावी दौरा: ताबड़तोड़ रैलियां

Jammu – Kashmir में चुनावी माहौल को गर्म करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi आदित्यनाथ आज से तीन रैलियों को सम्बोधित करेगे उनका पहला पड़ाव जम्मू के छम्ब विधानसभा क्षेत्र में दोपहर 12 बजे होगा। इसके बाद, वे रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में BJP के समर्थन में माहौल बनाने के लिए दोपहर 1:30 बजे पहुंचेंगे। उनकी तीसरी और अंतिम रैली RS पुरा दक्षिण जम्मू में दोपहर 3 बजे होगी।Jammu – Kashmir में अब तक दो चरणों का मतदान हो चुका है, और तीसरे चरण के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। CM Yogi आदित्यनाथ की तीन प्रमुख रैलियां: जम्मू-कश्मीर चुनाव का प्रचार अभियान तेज BJP ने अपने गढ़ माने जाने वाले हिंदू बहुल जिलों जम्मू, सांबा, कठुआ और उधमपुर पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां तीसरे चरण में मतदान होना है। CM Yogi आदित्यनाथ के साथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी आज जम्मू संभाग में पांच चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। उनके कार्यक्रम की शुरुआत चनैनी में सुबह 10:30 बजे होगी। इसके बाद वे उधमपुर पश्चिम, बनी, जसरोटा और मढ़ में रैलियां करेंगे।पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा भी इस चुनावी प्रचार में भाग लेंगे। BJP का लक्ष्य: हिंदू बहुल क्षेत्रों में फिर से बहुमत पाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जम्मू में एक बड़ी रैली को संबोधित करने वाले हैं।तीसरे चरण में 40 सीटों पर वोटिंग एक अक्टूबर को होगी, जिसमें जम्मू, बांदीपोरा, उधमपुर, कुपवाड़ा, सांबा, बारामूला, कठुआ आदि शामिल हैं। चुनाव परिणाम 8 अक्टूबर को आएंगे।BJP की रणनीति यह है कि वह अपने मजबूत क्षेत्रों में एक बार फिर से बहुमत हासिल कर सके, और इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं का चुनावी दौरा काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। ऐसे ही और अपडेट के लिए बने रहें नितिपथ के साथ। धन्यवाद! Pooja Mishra
Read more
पहले चरण का मतदान शुरू

पहले चरण के मतदान में जम्मू-कश्मीर की जनता का उत्साह, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जम्मू-कश्मीर में आज विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है। यह चुनाव 10 साल बाद हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। जम्मू-कश्मीर में सात जिलों की 24 सीटों पर मतदान हो रहा है, जिसमें अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, डोडा, रामबन, किश्तवाड़ और कुलगाम शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। केंद्र शासित प्रदेश में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 87.09 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 42.6 लाख महिलाएं हैं।चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत, पहले चरण के मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, खासकर आतंकवादी हमलों को ध्यान में रखते हुए। सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि मतदाता स्वतंत्रता से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। कुल 3276 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जहां मतदाता अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।इस चुनाव का महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि यह अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहला विधानसभा चुनाव है। अगस्त 2019 में इस अनुच्छेद को खत्म करने के बाद से क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता की बहाली की कोशिशें जारी हैं। इस बार मतदाता अपने नेताओं का चुनाव करने के लिए उत्सुक हैं।मतदान के पहले दिन, विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। दोपहर 1 बजे तक 41.2% मतदान हो चुका था। विभिन्न जिलों में मतदान का प्रतिशत भिन्नता दिखा रहा है; जैसे कि डोडा में 50.81%, किश्तवाड़ में 56.86% और पुलवामा में 29.84% वोटिंग हुई है।एक मतदाता, कल्पान कौल ने बताया कि, “मुझे मतदान करके बहुत खुशी हो रही है। 10 साल बाद मैंने अपनी मातृभूमि के लिए वोटिंग की है। हमने उस प्रत्याशी के लिए वोट दिया है जिससे हमें उम्मीद है कि वह हमारे कश्मीर के लिए बहुत कुछ करेगा।”दिल्ली में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए भी वोटिंग की सुविधा दी गई है। जम्मू कश्मीर हाउस में मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। हालांकि, कुछ मतदाता नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने से नाराजगी भी जता रहे हैं। राजनीतिक दलों के नेता भी इस चुनाव में अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने में लगे हैं। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के पूर्व अध्यक्ष विकार रसूल वानी ने कहा, “मैंने 2008 और 2014 में चुनाव लड़ा था और जीता भी था। आज मैंने अपने समर्थन में अधिक लोगों को देखा है। मुझे विश्वास है कि इस चुनाव में भी मुझे जीत मिलेगी।”जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी लोगों से वोट करने की अपील की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज जम्मू-कश्मीर में मतदान का पहला चरण है। इसलिए मैं उन सभी मतदाताओं से अपील करता हूं जिनके क्षेत्र में मतदान हो रहा है कि वे अपने मताधिकार का जरूर इस्तेमाल करें। खासतौर पर युवा, महिलाएं और जो पहली बार वोट दे रहे हैं।”कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी लोगों से वोट देने की अपील की और लिखा, “मेरे भाइयों और बहनों, आज प्रदेश में पहले चरण के मतदान हो रहे हैं। यह आपका संवैधानिक अधिकार है।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लोगों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।कुलगाम के डिप्टी कमिश्नर ने भी स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा, “हर जगह मतदान सुचारू रूप से चल रहा है। हमारे 372 मतदान केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं। हम यहां से हर मतदान केंद्र पर अपनी निगरानी भी रखते हैं।”आज की वोटिंग में जम्मू-कश्मीर के युवा मतदाताओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। यहां पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं की संख्या 3.71 लाख है। कुल 20.7 लाख मतदाता 20 से 29 वर्ष की आयु के बीच हैं। यह दर्शाता है कि युवा मतदाता अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए तत्पर हैं। पहले चरण का मतदान शुरू, 10 साल बाद का महत्वपूर्ण मौका जम्मू-कश्मीर में मतदान की प्रक्रिया के दौरान, पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान करने की अपील की है। भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में प्रथम चरण के लिए मतदान कर रहे सभी मतदाताओं से भारी संख्या में मतदान करने की अपील करता हूं।”इस पहले चरण की वोटिंग को लेकर जम्मू-कश्मीर की आम जनता में उत्साह और उमंग देखने को मिल रही है। लोग अपने नेताओं का चुनाव करने के लिए तैयार हैं और अपने मताधिकार का प्रयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।इस प्रकार, जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के मतदान के साथ ही यह स्पष्ट हो रहा है कि स्थानीय लोग लोकतंत्र की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी को लेकर कितने गंभीर हैं। अब अगली वोटिंग 25 सितंबर को होगी, और इसके बाद 1 अक्टूबर को अंतिम चरण का मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। Pooja Mishra
Read more
कड़ी सुरक्षा में LOC के पास मकरी: भारत का आखिरी मतदान केंद्र तैयार

कड़ी सुरक्षा में LOC के पास मकरी: भारत का आखिरी मतदान केंद्र तैयार

Jammu – Kashmir: कड़ी सुरक्षा के बीच LoC पर भारत का आखिरी मतदान केंद्र Jammu – Kashmir के राजौरी जिले के नियंत्रण रेखा (LoC) पर बसे एक छोटे से गांव मकरी में आगामी चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। यह गांव भारत के आखिरी मतदान केंद्रों में से एक है, जो भौगोलिक अलगाव और सुरक्षा खतरों के बावजूद लोकतंत्र की मजबूती की प्रतीक बनता है। यहां 51 ऐसे मतदान केंद्र हैं जो एलओसी के पास स्थित हैं और चुनाव आयोग इन सभी सीमावर्ती मतदान केंद्रों पर सुरक्षित और सफल मतदान सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है।मकरी गांव, जो पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है, ने आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। अब, आगामी चुनावों के लिए ग्रामीणों में उत्साह और उम्मीद की लहर है। वे आशा करते हैं कि ये चुनाव न केवल शांति लाएंगे बल्कि उनके सीमावर्ती गांवों में विकास भी सुनिश्चित करेंगे। एक गांववाले ने कहा, “हमें बेहतर सड़कें, चिकित्सा सुविधाएं और हमारे बच्चों के लिए अधिक शिक्षक चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था और तैयारी चुनाव की तैयारी के तहत, चुनाव आयोग ने मकरी और अन्य एलओसी पर स्थित मतदान केंद्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इलाके में घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों के खतरे को देखते हुए, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। पिछले चुनावों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सेना, केंद्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस मिलकर नियमित गश्त कर रहे हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की व्यवधान को रोका जा सके।एडीसी नौशेरा, बाबू राम टंडन ने कहा, “हमारी टीम, जिसमें सेक्टर मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार, जोनल मजिस्ट्रेट गुरदयाल सिंह, बीएलओ गोरख नाथ और सुपरवाइजर रोमी चौधरी शामिल हैं, नियंत्रण रेखा के पास के सभी मतदान केंद्रों का लगातार दौरा कर रही है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव प्रक्रिया के लिए सब कुछ ठीक है।”पाकिस्तान सीमाके करीब होने के कारण, माकरी के मतदान केंद्र को भारी सैन्य सुरक्षा से घेर लिया गया है। इसके बावजूद, गांववाले भारत के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका को लेकर गर्व और आशा से भरे हुए हैं। BLO गोर्ख नाथ ने कहा, “हम सीमा पर रहने वाले भारत के बहादुर निवासी हैं, लेकिन हमें विश्वास है कि हमारा वोट मायने रखता है।” माकरी में कुल 593 मतदाता हैं, और पिछले लोकसभा चुनावों में 70% से अधिक मतदान की दावा की गई है। यह दिखाता है कि सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद, लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। विकास की आशा ग्रामीणों की आकांक्षाएं सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं हैं। वे लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “सड़कें बहुत खराब हालत में हैं और हमें एक चालू अस्पताल की तत्काल जरूरत है। हम इन सुविधाओं का सालों से इंतजार कर रहे हैं।”जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सीमावर्ती गांवों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है। आतंक का खतरा भले ही मंडरा रहा हो, लेकिन मकरी और आसपास के इलाकों के लोग भारतीय लोकतंत्र में अपनी आस्था को लेकर दृढ़ हैं। उनका मानना है कि यह चुनाव न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि उनके दूरदराज के गांवों में अत्यंत आवश्यक विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। –Pooja Mishra
Read more
कड़ी सुरक्षा में LOC के पास मकरी: भारत का आखिरी मतदान केंद्र तैयार

कड़ी सुरक्षा में LOC के पास मकरी: भारत का आखिरी मतदान केंद्र तैयार

Jammu – Kashmir: कड़ी सुरक्षा के बीच LoC पर भारत का आखिरी मतदान केंद्र Jammu – Kashmir के राजौरी जिले के नियंत्रण रेखा (LoC) पर बसे एक छोटे से गांव मकरी में आगामी चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। यह गांव भारत के आखिरी मतदान केंद्रों में से एक है, जो भौगोलिक अलगाव और सुरक्षा खतरों के बावजूद लोकतंत्र की मजबूती की प्रतीक बनता है। यहां 51 ऐसे मतदान केंद्र हैं जो एलओसी के पास स्थित हैं और चुनाव आयोग इन सभी सीमावर्ती मतदान केंद्रों पर सुरक्षित और सफल मतदान सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है।मकरी गांव, जो पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है, ने आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। अब, आगामी चुनावों के लिए ग्रामीणों में उत्साह और उम्मीद की लहर है। वे आशा करते हैं कि ये चुनाव न केवल शांति लाएंगे बल्कि उनके सीमावर्ती गांवों में विकास भी सुनिश्चित करेंगे। एक गांववाले ने कहा, “हमें बेहतर सड़कें, चिकित्सा सुविधाएं और हमारे बच्चों के लिए अधिक शिक्षक चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था और तैयारी चुनाव की तैयारी के तहत, चुनाव आयोग ने मकरी और अन्य एलओसी पर स्थित मतदान केंद्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इलाके में घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों के खतरे को देखते हुए, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। पिछले चुनावों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सेना, केंद्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस मिलकर नियमित गश्त कर रहे हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की व्यवधान को रोका जा सके।एडीसी नौशेरा, बाबू राम टंडन ने कहा, “हमारी टीम, जिसमें सेक्टर मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार, जोनल मजिस्ट्रेट गुरदयाल सिंह, बीएलओ गोरख नाथ और सुपरवाइजर रोमी चौधरी शामिल हैं, नियंत्रण रेखा के पास के सभी मतदान केंद्रों का लगातार दौरा कर रही है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव प्रक्रिया के लिए सब कुछ ठीक है।”पाकिस्तान सीमाके करीब होने के कारण, माकरी के मतदान केंद्र को भारी सैन्य सुरक्षा से घेर लिया गया है। इसके बावजूद, गांववाले भारत के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका को लेकर गर्व और आशा से भरे हुए हैं। BLO गोर्ख नाथ ने कहा, “हम सीमा पर रहने वाले भारत के बहादुर निवासी हैं, लेकिन हमें विश्वास है कि हमारा वोट मायने रखता है।” माकरी में कुल 593 मतदाता हैं, और पिछले लोकसभा चुनावों में 70% से अधिक मतदान की दावा की गई है। यह दिखाता है कि सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद, लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। विकास की आशा ग्रामीणों की आकांक्षाएं सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं हैं। वे लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “सड़कें बहुत खराब हालत में हैं और हमें एक चालू अस्पताल की तत्काल जरूरत है। हम इन सुविधाओं का सालों से इंतजार कर रहे हैं।”जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सीमावर्ती गांवों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है। आतंक का खतरा भले ही मंडरा रहा हो, लेकिन मकरी और आसपास के इलाकों के लोग भारतीय लोकतंत्र में अपनी आस्था को लेकर दृढ़ हैं। उनका मानना है कि यह चुनाव न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि उनके दूरदराज के गांवों में अत्यंत आवश्यक विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। –Pooja Mishra
Read more
Jammu-Kashmir

Jammu-Kashmir की राजनीति में परिवारवाद: उभरते नेताओं की नई पहल

Jammu-Kashmir में परिवारवाद का नया युग: उभरते नेता और उनकी विरासत Jammu – Kashmir राजनीतिक विरासत का नया दौर: उभरते नेता अपने परिवाद की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं Jammu – Kashmir की राजनीति में एक नई पीढ़ी के नेताओं की एंट्री हो रही है, जो अपने परिवार की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत और अपने परिवाद की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह परिवारगत राजनीति राज्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में बाधा को दिखा रही है।पूर्व एनसी नेता और People’s Democratic Party (PDP) के सदस्य दिवंगत सादिक अली के बेटे तनवीर सादिक ने अपने पिता की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत को अपनाते हुए एक नए युग की शुरुआत की है। सादिक अली के नेतृत्व में एनसी ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले लिए थे और अब तनवीर अपने परिवारवाद की परंपरा अपनाते हुए राजनीतिक सक्रियता में योगदान दे रहे हैं।पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम रसूल कर के बेटे इरशाद रसूल कर ने भी अपने पिता की ऐतिहासिक राजनीति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। इरशाद ने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे है लेकिन यह बदलाव सिर्फ झासा है क्योकि सिर्फ चेहरा नया है लेकिन सोच पुरानी और इरशाद रसूल अपने पिता की तरह ही बड़े राजनीतिक उद्देश्य प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे है लेकिन हमें नई सोच नए बदलाव की जरुत है। Jammu-Kashmir में परिवारवाद की राजनीति: नए नेताओं की चुनौती Jammu-Kashmir के पूर्व विधायक मुहम्मद शफी के बेटे सज्जाद शफी भी अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मुहम्मद शफी ने उरी विधानसभा क्षेत्र का वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया और अब सज्जाद उनकी इस राह पर चलकर क्षेत्र की समस्याओं को हल करने की दिशा में काम कर रहे हैं।वरिष्ठ एनसी नेता और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रेयाज बेदार के बेटे जाविद रेयाज बेदार ने अपने पिता की राजनीतिक और प्रशासनिक विरासत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। जाविद की राजनीति में एंट्री ने क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन के बेटे हिलाल अकबर लोन ने भी राजनीति में कदम रखा है। उनके पिता का राजनीतिक अनुभव और प्रभावशाली कैरियर हिलाल की राजनीति में मददगार साबित हो रहा है। कैबिनेट मंत्री, स्पीकर और सांसद जैसे पदों पर रहने के बाद, हिलाल की एंट्री को एक बड़ी राजनीतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है।ये सभी उभरते नेता अपने परिवारवाद की परंपराओं और योगदानों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया दौर शुरू हो सकता है। उनके आने से क्षेत्रीय राजनीति में एक नई दिशा और ऊर्जा का संचार हो रहा है लेकिन परिवारवाद की नीती पुरानी है आपको क्या लगता है परिवारवाद की किस हद तक सही हो हमें comment box में comment करके जरुर बताए |   ~ Pooja Mishra
Read more
हरियाणा विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने पहली सूची जारी की, पहलवान विनेश फोगाट जुलाना से चुनावी मैदान में

विनेश फोगाट जुलाना से कांग्रेस की उम्मीदवार: हरियाणा चुनाव में पहली राजनीतिक पारी

हरियाणा विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने पहली सूची जारी की, पहलवान विनेश फोगाट जुलाना से चुनावी मैदान में हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इस सूची में 31 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं, जिसमें एक प्रमुख नाम पहलवान विनेश फोगाट का है। विनेश फोगाट को जुलाना विधानसभा सीट से कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार घोषित किया गया है।पहलवान विनेश फोगाट ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद पार्टी जॉइन की थी। उनकी इस राजनीतिक यात्रा में उनके साथ मशहूर पहलवान बजरंग पूनिया भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं।विनेश फोगाट का यह पहला चुनाव है, और वे इसे अपने ससुराल जुलाना से शुरू कर रही हैं। जुलाना की जनता उन्हें एक प्रमुख पहलवान के रूप में जानती और सराहती है। यह सीट विनेश के लिए खास है क्योंकि उनके ससुराल का गांव बख्ता खेड़ा जुलाना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वहीं, उनके मायके का गांव बलाली चरखी-दादरी विधानसभा क्षेत्र के तहत आता है। कांग्रेस में शामिल होने के बाद, विनेश फोगाट ने कहा, “जब मेरी बहनों के लिए कोई नहीं होगा, तो कांग्रेस और मैं उनके साथ होंगे। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, यह जारी है और हम इसे जीतेंगे। नए मंच के साथ, हम देश की सेवा के लिए अपनी पूरी मेहनत करेंगे। जैसे हमने खेल के मैदान में अपना दिल लगाकर खेला, वैसे ही हम अपने लोगों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे।”कांग्रेस की पहली सूची में विनेश फोगाट का नाम और उनका जुलाना से चुनाव लड़ना इस बार की विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चाओं में है। जुलाना की सीट पर उनकी संभावनाओं पर नजरें टिकी हुई हैं, और देखना यह होगा कि वे अपनी पहलवानी की तरह राजनीति के मैदान में भी सफलता प्राप्त कर पाती हैं या नहीं। –Pooja Mishra
Read more
जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव: नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरू

जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव: नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरू

जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव, 10 साल बाद गूंजेगा सवाल: अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव तीन चरणों में होंगे: पहले चरण में 24 सीटों पर 18 सितंबर, दूसरे चरण में 26 सीटों पर 25 सितंबर, और तीसरे चरण में 40 सीटों पर 1 अक्टूबर को मतदान होगा। चुनाव के परिणाम 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।इस बार के चुनाव को लेकर जनता और राजनीतिक दलों में उत्साह का माहौल है, लेकिन एक दशक में जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल चुका है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद, इलाके की फिजाओं में बड़ा बदलाव आया है और लोग अब नई उम्मीदों और नजरियों के साथ चुनाव की ओर देख रहे हैं। मतदाताओं की बदलती उम्मीदें और नई संभावनाएं जम्मू-कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं की उम्मीदें और अपेक्षाएँ तेजी से बदल रही हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से इलाके में हुए बदलावों का असर स्थानीय लोगों के जीवन पर साफ नजर आ रहा है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से लेकर आधुनिक तकनीकों के उपयोग तक, हर जगह नए बदलाव देखे जा रहे हैं।डल झील के शिकारा मालिकों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है और स्थिति में सुधार हुआ है। शिकारा मालिक इमरान ने बताया कि चुनाव से उन्हें बेहतर कश्मीर की उम्मीद है और डल झील के प्रदूषण को चुनावी मुद्दा बनाने की जरूरत है। वहीं, एक फूल विक्रेता ने पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े बदलावों का जिक्र किया और शिकारा टी स्टॉल के मालिक ने बिक्री में हुए सुधार की खुशी जाहिर की है।उत्तरी कश्मीर का पट्टन, जो कभी आतंक और अशांति का केंद्र था, अब शांतिपूर्ण हो चुका है और चुनाव के लिए तैयार है। यहां के लोग अब सुरक्षा और स्थिरता की ओर आशान्वित हैं। बारामूला के वाघूरा में सेब के बगीचे के पारंपरिक किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें ड्रोन शामिल हैं। यह बदलाव कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का संकेत देता है। कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास नवनिर्मित पंडित कॉलोनी में रहने वाले कश्मीरी पंडित, जो पहले विस्थापित हो गए थे, अब पूरे कश्मीर में नई कॉलोनियों में पुनर्वासित किए जा रहे हैं। वे आगामी चुनावों को लेकर उत्साहित हैं और उन्हें डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान का अवसर मिलेगा। कश्मीरी पंडितों ने कहा कि वे अब कश्मीर में सुरक्षित महसूस करते हैं और अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहना चाहते हैं। 2014 के चुनाव परिणाम और वर्तमान स्थिति जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे। उस समय 87 सीटों में से पीडीपी ने 28, बीजेपी ने 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं। बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने थे। उनके निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन गठबंधन जल्द ही टूट गया और राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया। वर्तमान में राष्ट्रपति शासन लागू है।पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया था। अब, एक दशक बाद, जम्मू-कश्मीर के लोग और राजनीतिक दल नई उम्मीदों और चुनौतियों के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की ओर देख रहे हैं। –Pooja Mishra
Read more