बहती नदियों के बीच बसी दिल्ली बूँद बूँद पानी के लिए तरस रही है… आख़िर क्युं ?

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Water Shortage in delhi

देश की राजधानी दिल्ली और उसे साथ लगा NCR का इलाक़ा.. ये पूरा दिल्ली NCR…एक नहीं दो- दो नदियों के बीच बसा है ….. एक तरफ तो बीचोंबीच से यमुना नदी बहती हुई निकलती हैं.. और एक तरफ हिंडन नदी..जो पश्चिमी उत्तरप्रदेश के बागपत बडौत इलाक़े से बहती हुई NCR के ग़ाज़ियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा होते हुए आगे निकलती है.. जरा सोचिए कि दो – दो नदियां के मुहाने पर बसी दिल्ली बूँद बूंद पानी को मोहताज हैं…पानी की ज़बरदस्त क़िल्लत झेल रही है… पिछले कई सालों से दिल्ली में भयंकर जल संकट लगभग हर साल की कहानी बन चुकी है… गरमी बढ़ती है..पानी के लिए त्राहिमाम.. हाँककर मचता है.. और दिल्ली की सरकार चलाने वाली आम आदमी पार्टों को बहानों और बयानों के अलावा कुछ सुझता ही नहीं है… आलम ये होता है कि गरमी शुरू होने से पहले पानी को लेकर बड़े बड़े वायदे.. दावे और गरमी के दिनों में दिल्लीवाले जब भयंकर जल संकट में फँसते हैं तो केजरवील सरकार और बीजेपी के बीच ज़ुबानी जंग, राजनीतिक बयानबाज़ी का दौर शुरू हो जाता है … और दिल्ली वाले मजबूरन अपनी मायूसी के आंसू से ही अपनी प्यास बुझाने की असंभव कोशिश में लग जाते हैं… और क़िल्लत हद से ज़्यादा बढ़ जाए तो दिल्ली का टैंकर माफ़ियाँ है न दिल्ली के लोगों की मेहनत की कमाई का पैसा चुसने लेने के लिए.. ये तो रही पानी पर राजनीति चमकाने की कहानी… लेकिन साथ ही सोचने वाली बात ये भी जिससे मैंने इस ब्लाग के लाइनों की शुरूआत की थी कि दिल्ली के आस पास दो नदियाँ बहती हैं.. वावजूद इसके दिल्ली प्यासी क्युं रहती है.. और जानते हैं कि इस प्रश्न का उत्तर इसी प्रश्न के एक शब्द में छुपा है…दिल्ली के आसपास दो नदियाँ नही… बल्कि अब दो नाले बहते हैं..ये लिखते हुए दुख तो मुझे भी हो रहा है लेकिन कड़वी सच्चाई यही है कि सरकार , सिस्टम और दिल्ली और उसके आसपास रहने वाले लोगों के रवैये, व्यवहार नें हर बीतते दिन के साथ इन नदियों को एक गंदे , ज़हरीले, प्रदूषित नाले में तब्दील कर दिया है..जिसका पानी पीने लायक़ तो छोड़िए.. अब तो हाथ से छूने लायक़ भी नहीं बचा है… तो सोचिए ना कितनी बड़ी त्रासदी है ये.. कहने तो दो नदियां बहती हैं.. लेकिन ख़ाली कहने को बस… नदियाँ की परिभाषा से मीलों दूर ये जल प्रवाह… बस अब नाले कहे जाने लगे हैं… Water Shortage in Delhi

 

दिल्ली में जलसंकट क्यों है?

अब केवल कहने को नदियां हैं यमुना और हिंडन… और उसके बीच बसी दिल्ली में पानी की कमी क्युं न हो…. इन जल स्त्रोत को भ्रष्ट सरकारी सिस्टम के corruption ने इतना गंदा कर दिया…इन नदियों को जहरीले कूडा कचरे का ढेर बना देने में दिल्ली और आसपास के लोग भी कम जिम्मेदार नही हैं… तो जब पानी शुद्द बचा ही नही… जब उस पानी में केमिकल का जहर हर रोज मिल रहा है… मिलाया जा रहा है तो.. कैसे मिलेगा इससे पीने का पानी ? दिल्ली में लगभग हर साल जल संकट के कुछ और कारण भी हैं। पहला, प्रचंड गर्मी.. पिछले कुछ सालों से दिल्ली और आसपास के कई क्षेत्रों का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चूंका है दूसरा कारण… पानी के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता की विवशता। भयानक गर्मी के चलते पानी की मांग बढ़ गई है। दिल्ली की आबादी की तुलना में पानी की सप्लाई पहले से बहुत कम हो गई है… और ऐसा क्युं है.. तो इस सवाल का जवाब घूम के वहीं आ जाता है कि दिल्ली का अब अपना कोई जल स्रोत तो बचा नही है… नदियां थी वो अब जहीराला नाला हैं…तो पानी के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर होने के अलावा विकल्प क्या है दिल्ली के पास… अब तपती प्रचंड गर्मी के चलते अन्य राज्य भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में दिल्ली के लिए मुश्किलें पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ गई हैं… DJB ( Delhi jal board )के एक आंकड़े के मुताबिक इस साल दिल्ली आवश्यकता से 32.1 करोड़ गैलन प्रति दिन पानी की कमी से जूझ रही है।

 

क्या हुआ सरकारी प्लानों का?  Water Shortage

अब दिल्ली की सरकार चलाने वाले चाहे बीजेपी हो या अभी की आम आदमी पार्टी… लगभग हर साल ही जल संकट से निपटने के लिए ये सरकारें काग़ज़ों पर… फ़ाइलों में योजनाएं लाती रहती है और हर बीतते साल ये दावा करती आयी हैं कि इस साल हालात बेहतर होंगे..इस साल हालात बदलेंगे… इस साल पानी की क़िल्लत नहीं होगी…. लेकिन हर बीतते साल के साथ ये समस्या पहले से ज़्यादा… और ज़्यादा… और भी ज़्यादा विकराल होती चली गई…. उदाहरण के तौर पर 2023 की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली सरकार ने ऊंचे जलस्तर वाले क्षेत्रों में 500 ट्यूबवेल लगाने का ऐलान किया था. इसके अलावा शोधित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी को प्राकृतिक और कृत्रिम झीलों में डालकर भूजल स्तर बढ़ाने के बड़े बड़े दावे किए थे केजरीवाल सरकार ने… लेकिन हुआ क्या आज तक… अबतक… इतने सालों में… ज़ीरो…
बस हर साल कभी हरियाणा सरकार पर पानी नहीं छोड़ने का ठीकरा फोड़ दो.. तो कभी दिल्ली की पाइप लाइन काटने का षणयंत्र बता दो.. तो कभी कुछ और… और पानी को तरसती दिल्ली का एक साल और इन्हीं सभी बातों में फिर से निकल जाएगा….अगले साल के लिए विभाग, departement. फिर से काग़ज़ी योजनाओं की नई फाइल तैयार की कर लेगा.. और ऐसे ही दिल्ली में गरमी के साल दर साल निकलते चले जाएँगे|

 

 

-Khushi Sharma

 

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