भारत में डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र मेंUPI (Unified Payment Interface) ने एक नई क्रांति ला दी है। इस प्लेटफॉर्म के बढ़ते use के साथ ही अब ट्रांजेक्शन फीस लगाने की मांग भी उठने लगी है।हाल ही में लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है कि 38% लोग अपने लेनदेन का 50% से अधिक भाग UPI के माध्यम से कर रहे हैं। इसके बावजूद, 22% UPI यूजर्स ट्रांजेक्शन फीस लगाने के निर्णय का support करते हैं, जबकि 75% यूजर्स का मानना है कि अगर फीस लागू की गई, तो वे UPI का Use बंद कर देंगे।इस सर्वे में देश के 308 जिलों से 42,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिसमें 63% पुरुष और 37% महिलाएं थीं। respondents में 41% टियर-1, 30% टियर-2 और 29% टियर-3, 4 और ग्रामीण इलाकों से थे।फिनटेक क्षेत्र से जुड़े लोग और बैंक अब सरकार पर दबाव डाल रहे हैं कि UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की अनुमति दी जाए। कारोबारी चाहते हैं कि जैसे डेबिट-क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन पर चार्ज लिया जाता है, वैसे ही UPI ट्रांजेक्शन पर भी शुल्क लगाने की अनुमति दी जाए।UPI को 2016 में लॉन्च किया गया था और इसने भारत में digital payment के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। इसके use में तेजी के चलते कई अन्य देशों ने भी इसकी तर्ज पर अपनी तकनीक विकसित करने की रुचि दिखाई है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है।Digital payment के इस new ers में UPI की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है, लेकिन यह देखना होगा कि ट्रांजेक्शन फीस की संभावित लागू होने पर इसके use पर क्या effect पड़ेगा। ऐसे ही और अपडेट के लिए बने रहें नितिपथ के साथ। धन्यवाद!
Pooja Mishra
