Monkeypox का ग्लोबल खतरा: भारत में इसका जोखिम कितना गंभीर?

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Monkeypox के खतरे की समीक्षा और भारत में रिस्क का आकलन

WHO ने Monkeypox के तेजी से बढते मामले पर फिर एक बार जताई चिंता है . अफ्रीकी देशों जैसे कांगो, केन्या, रवांडा और युगांडा समेत दस देशों में इन दिनों मंकीपॉक्स (Mpox) वायरस का कहर देखने को मिल रहा है। एमपॉक्स के मामलों में चिंताजनक वृद्धि को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन [WHO ] ने इमरजेंसी बैठक बुलाई। संगठन को डर है कि कोरोना वायरस की तरल यह वायरस भी अन्य अफ्रिकी देशों और दुनिया के अन्य देशों में भी फैल सकता है।

कांगो में बीते साल भी से ही  मंकीपॉक्स के मामलों में तेजी देखी जा रही है। इसकी वजह से ही इसके पडोसी देशों में भी नया स्ट्रेन भी पाया गया है, जिसने WHO की चिंता को बढ़ा दिया कि कहीं यह बीमारी दुनिया में स्वास्थ्य जोखिम ना पैदा कर दे।

Monkeypox क्या है ? आइये जानते है

एमपोक्स या मंकीपॉक्स वायरस की वजह से होता है। यह एक संक्रामक के कारण होने वाला रोग है, जो मनुष्यों और कुछ जानवरों में हो सकता है (Monkeypox Viral Disease }). इसके लक्षण बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, सूजी हुई लिम्फ नोड्स और थकान महसूस करने के साथ शुरू होते हैं. इसके बाद एक चकत्ता होता है जिसके ऊपर फफोले और पपड़ी बनता है. इस बिमारी के लक्षणों का पता लगभग 10 दिनों में चलता है (Monkeypox Symptoms).

मंकीपॉक्स, किसी जानवर के काटने या खरोंच, शरीर के तरल पदार्थ, दूषित वस्तुओं या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैल सकता है. वायरस के डीएनए के लिए एक घाव का परीक्षण करके निदान की पुष्टि की जाती है (Monkeypox Diagnosis). यह रोग चिकनपॉक्स के समान दिखाई देता है. जो चेचक की तरह दिखाई देता है।

-Khushi Sharma

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