Jammu-Kashmir में परिवारवाद का नया युग: उभरते नेता और उनकी विरासत
Jammu – Kashmir राजनीतिक विरासत का नया दौर: उभरते नेता अपने परिवाद की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं
Jammu – Kashmir की राजनीति में एक नई पीढ़ी के नेताओं की एंट्री हो रही है, जो अपने परिवार की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत और अपने परिवाद की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह परिवारगत राजनीति राज्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में बाधा को दिखा रही है।पूर्व एनसी नेता और People’s Democratic Party (PDP) के सदस्य दिवंगत सादिक अली के बेटे तनवीर सादिक ने अपने पिता की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत को अपनाते हुए एक नए युग की शुरुआत की है। सादिक अली के नेतृत्व में एनसी ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले लिए थे और अब तनवीर अपने परिवारवाद की परंपरा अपनाते हुए राजनीतिक सक्रियता में योगदान दे रहे हैं।पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम रसूल कर के बेटे इरशाद रसूल कर ने भी अपने पिता की ऐतिहासिक राजनीति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। इरशाद ने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे है लेकिन यह बदलाव सिर्फ झासा है क्योकि सिर्फ चेहरा नया है लेकिन सोच पुरानी और इरशाद रसूल अपने पिता की तरह ही बड़े राजनीतिक उद्देश्य प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे है लेकिन हमें नई सोच नए बदलाव की जरुत है।
Jammu-Kashmir में परिवारवाद की राजनीति: नए नेताओं की चुनौती
Jammu-Kashmir के पूर्व विधायक मुहम्मद शफी के बेटे सज्जाद शफी भी अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मुहम्मद शफी ने उरी विधानसभा क्षेत्र का वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया और अब सज्जाद उनकी इस राह पर चलकर क्षेत्र की समस्याओं को हल करने की दिशा में काम कर रहे हैं।वरिष्ठ एनसी नेता और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रेयाज बेदार के बेटे जाविद रेयाज बेदार ने अपने पिता की राजनीतिक और प्रशासनिक विरासत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। जाविद की राजनीति में एंट्री ने क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन के बेटे हिलाल अकबर लोन ने भी राजनीति में कदम रखा है। उनके पिता का राजनीतिक अनुभव और प्रभावशाली कैरियर हिलाल की राजनीति में मददगार साबित हो रहा है। कैबिनेट मंत्री, स्पीकर और सांसद जैसे पदों पर रहने के बाद, हिलाल की एंट्री को एक बड़ी राजनीतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है।ये सभी उभरते नेता अपने परिवारवाद की परंपराओं और योगदानों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया दौर शुरू हो सकता है। उनके आने से क्षेत्रीय राजनीति में एक नई दिशा और ऊर्जा का संचार हो रहा है लेकिन परिवारवाद की नीती पुरानी है आपको क्या लगता है परिवारवाद की किस हद तक सही हो हमें comment box में comment करके जरुर बताए |
~ Pooja Mishra
