Jammu-Kashmir Assembly Elections 2024: सियासी हलचल
Jammu-Kashmir में 10 साल के लंबे इतंजार के बाद होने जा रहे Assembly elections का ऐलान हो गया है इसी के साथ ही क्षेत्र की राजनीतिक हलचलें भी तेज हो गई हैं। Election comission ने हाल ही में ऐलान किया है कि Jammu -Kashmir में तीन चरणों में Assembly elections आयोजित किए जाएंगे। मतदान की तारीखें 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को निर्धारित की गई हैं। यह चुनावी प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद यह पहला Assembly elections है, जिसमें क्षेत्र की राजनीतिक दिशा और भविष्य पर महत्वपूर्ण effect पड़ेगा।
5 अगस्त 2019 को Central goverment ने अनुच्छेद 370 को रद्द करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—Jammu -Kashmir और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से Jammu -Kashmir में राजनीतिक गतिविधियां काफी हद तक सीमित हो गई थीं। अब, Assembly elections घोषणा के साथ, राजनीतिक दलों के बीच activity फिर से देखने को मिल रही है।
Jammu -Kashmir में प्रमुख राजनीतिक दलों में कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस शामिल हैं। ये सभी दल अपने-अपने एजेंडे और रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे, जिसमें किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। उस समय, पीडीपी ने 28 सीटों के साथ सबसे अधिक सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 25 सीटें मिली थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस को क्रमशः 15 और 12 सीटें मिली थीं।
पीडीपी और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन यह गठबंधन सरकार पूरे कार्यकाल तक नहीं चल सकी। मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन बीजेपी और पीडीपी के बीच मतभेद बढ़ते गए और 2018 में महबूबा मुफ्ती ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इस बार के चुनाव में, कोई भी बड़ा राजनीतिक गठबंधन नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस इंडिया गठबंधन में शामिल हैं, लेकिन Jammu -Kashmir में उनके बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है।
Assembly Elections 2024: 10 साल बाद की सबसे बड़ी राजनीतिक टक्कर
बीजेपी ने इस बार जम्मू रीजन की 43 सीटों पर ध्यान केंद्रित किया है और अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी को उम्मीद है कि वह लगभग 35-36 सीटें हासिल कर सकती है। कश्मीर रीजन में, बीजेपी निर्दलीय उम्मीदवारों पर दांव लगाने की योजना बना रही है, जिन्हें बाद में पार्टी में शामिल किया जा सके। बीजेपी ने इस बार 40 साल से कम उम्र के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है और अल्पसंख्यक नेताओं को भी अपने पक्ष में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीडीपी नेता और महबूबा सरकार में मंत्री रहे चौधरी जुल्फिकार अली को बीजेपी में शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में दो सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी की चुनौती यह होगी कि वह जम्मू में अपनी पकड़ को बरकरार रखते हुए कश्मीर में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत कर सके।नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस चुनाव में अपने घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण वादे किए हैं, जिनमें 200 यूनिट मुफ्त बिजली, पानी के संकट से राहत, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को हर साल 12 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने की घोषणा शामिल है। पार्टी ने सत्ता में आने के 180 दिनों के भीतर एक व्यापक नौकरी पैकेज, एक लाख युवाओं को नौकरियां देने और सरकारी विभागों में सभी रिक्तियों को भरने का वादा किया है।
उमर अब्दुल्ला ने यह स्पष्ट किया है कि पार्टी केवल वही वादे कर रही है जिन्हें वह पूरा कर सकती है। पीडीपी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिज़ा मुफ्ती को भी शामिल किया गया है। इल्तिज़ा मुफ्ती बिजबिहारा Assembly Elections सीट से चुनाव लड़ेंगी। पीडीपी के इस कदम को पार्टी के भीतर नई ऊर्जा लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।इस बार के चुनावों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) कोटा लागू होने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। जम्मू-कश्मीर में सीटों की संख्या अब 90 हो गई है, जिसमें जम्मू क्षेत्र को सात में से छह अतिरिक्त सीटें मिली हैं।
2024 का चुनावी महासंग्राम: जम्मू-कश्मीर में 5 बड़ी चुनौतियां
Jammu -Kashmir अब Delhi और पुडुचेरी के बाद निर्वाचित Assembly Elections वाला तीसरा केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) बन जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि एसटी कोटा लागू होने से चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ता है।कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, और पीडीपी ने लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में कश्मीर की तीन सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच सीधा मुकाबला हो गया था।
कांग्रेस चाहती है कि विधानसभा चुनाव में वह एनसी और पीडीपी के साथ मिलकर लड़े, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई औपचारिक गठबंधन नहीं हुआ है।जम्मू-कश्मीर में आगामी Assembly Elections में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना बनी हुई है। कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सक्षम नहीं दिख रही है, जिससे गठबंधन की राजनीति की अहमियत बढ़ जाती है।
बीजेपी, कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, और पीडीपी सभी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि किस पार्टी या गठबंधन को जनता का समर्थन मिलता है। जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य पर इस Assembly Elections का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन सा दल या गठबंधन इस चुनौतीपूर्ण चुनावी परिदृश्य में विजयी होता है।
–Pooja Mishra
