वाराणसी-प्रयागराज में बाढ़ का रौद्र रूप: हजारों लोग हुए पलायन को मजबूर

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प्रयागराज और वाराणसी में गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिसके परिणामस्वरूप निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण शहरी क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लोगों को अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हालात इस कदर गंभीर हैं कि गलियों में नाव चलानी पड़ रही है।

वाराणसी में पिछले चार घंटे से तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है, जिससे गंगा और वरुणा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। गंगा का जलस्तर 70.82 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है। वहीं, वरुणा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।सोमवार को गंगा और यमुना का रौद्र रूप देखने को मिला। प्रयागराज में गंगा किनारे स्थित 150 गांवों और 20 मोहल्लों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लगभग 20,000 लोग बेघर हो गए हैं। इनमें से डेढ़ हजार लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि हजारों परिवार अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण ले रहे हैं।

प्रयागराज और वाराणसी में बाढ़ की स्थिति: जलस्तर खतरे के निशान के करीब

वाराणसी में, नमो घाट से लेकर अन्य घाटों तक बाढ़ का पानी भर गया है, जिसके कारण नावों के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है। जो नावें नदी में चलती थीं, अब वे गलियों में चल रही हैं। बाढ़ के कारण हजारों एकड़ में फसलें भी डूब गई हैं, और पशुओं के लिए चारे की कमी हो गई है।न सिर्फ वाराणसी, बल्कि फर्रुखाबाद, अयोध्या, मऊ, आजमगढ़ और बलिया में भी सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज कर दिया है, लेकिन अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।स्थानीय निवासियों ने सरकार से जल्द से जल्द सहायता की मांग की है, ताकि वे इस कठिनाई से बाहर निकल सकें। बाढ़ की इस स्थिति ने जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, और अब सभी की नजरें मौसम की सुधार पर टिकी हैं। ऐसे ही न्यु अपडेट्स के लिए जुड़े रहें नीतिपथ न्यूज के साथ। जय हिन्द!

Pooja Mishra

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