keshav prashad murya के बयान के बाद ,सवाल उठ रहे , CM Yogi पर सवाल
CM yogi Adityanath और डिप्टी सीएम Keshav prasad murya के बीच एक बार फिर कलह की शुरुआत नजर आ रही हैं.हाल में नेताओं के कुछ बयान और घटनाक्रमों ने इस मुद्दे और जोर दे दिया है हाल में पार्टी के आपसी मतभेद के लिए Bjp के नेता लखनऊ में जुटे थे. 14 जुलाई को प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति की बैठक हुई. इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा कई केंद्रीय मंत्री, राज्य स्तर के मंत्री और जिला स्तर के नेता भी पहुंचे थे. रिपोर्ट्स बताती है कि कार्यक्रम में करीब 2000 नेता और कार्यकर्ता जुटे थे. मकसद था कि कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता का मैसेज दिया जाए. लेकिन इसी बैठक में केशव प्रसाद मौर्य का दिया एक बयान बहुत तेजी से वायरल हुआ. जिसमें उन्होंने संगठन को सरकार से बड़ा बताया था. मौर्य ने कहा कि, “मैं हमेशा कहता था और आज इस प्रदेश कार्यसमिति के सामने कह रहा हूं कि संगठन सरकार से बड़ा है. संगठन से बड़ा कोई नहीं होता है. संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और हमेशा बड़ा रहेगा. मैं यहां सबके सामने कह रहा हूं कि मैं खुद को उपमुख्यमंत्री बाद में मानता हूं, भाजपा का कार्यकर्ता पहले मानता हूं.”
इसके बाद कार्यक्रम में CM yogi के बोलने की बारी थी. योगी ने कहा कि ‘अति आत्मविश्वास’ के कारण Bjp को नुकसान हुआ. योगी ने यह भी कहाँ की, “याद रखना, भाजपा है तो जिले में हमारा महापौर भी है, जिला पंचायत अध्यक्ष भी है, ब्लॉक प्रमुख भी है, चेयरमैन और पार्षद भी है. तो अगर कोई खरोच आती है तो उसका असर वहां भी पड़ने वाला है.”
लेकिन सबसे ज्यादा Trending मौर्य का बयान हुआ. मौर्य के बयान को लोग अलग-अलग perspective से ले रहे है . कुछ इस बयान को कार्यकर्ताओं में motivation वाले बयान के रूप में देख रहे हैं. वहीं, कुछ का मानना है कि ये प्रदेश के मुख्यमंत्री CM Yogi आदित्यनाथ पर तंज की तरह कसा गया है. सिर्फ केशव मौर्य ही नहीं बलकी बाकी नेता भी खुले आम सरकार और सरकार की नीतियों के खिलाफ बोल रहे हैं. लेकिन सवाल अब यह है की कहां रुकेगी ये नाराजगी क्योंकि यूपी की राजनीति अब दिल्ली पहुंच गई है. राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं कि Yogi आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के बीच रिश्ते शुरु से ही कभी ठीक नहीं रहे हैं. खुद केशव मौर्य के बयान से ऐसी बातों को हवा मिलती रही है. केशव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खांटी नेताओं में एक रहे हैं. अप्रैल 2016 में उन्हें यूपी Bjp का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था.2017 का विधानसभा चुनाव पार्टी ने उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा और बड़ी जीत हासिल की लेकिन इस जीत के बाद मुख्यमंत्री की रेस में उनका भी नाम शामिल था. लेकिन योगी आदित्यनाथ को राज्य का मुखिया बनाया गया. जानकार कहते हैं कि दोनों के बीच कलह की शुरुआत यहीं हो गई थी. जो समय-समय पर सबके सामने उजागर हो जाता है.2022 विधानसभा चुनाव से पहले भी ऐसे situation सामने आए है. तब RSS ने दोनों के बीच बीच-बचाव ओकरवाने की कोशिश की थी.22 जून 2021 को योगी आदित्यनाथ अचानक केशव मौर्य से मिलने पहुंचे थे. जानकार बताते हैं कि संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसवले और आरएसएस के दूसरे प्रतिनिधि भी वहां थे. चुनाव से पहले दोनों को मनाने की कोशिश हुई थी.तो सवाल अब यह है Yogi आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के आपसी रंजीस भाजपा को प्रभावित करेगी आपको क्या लगता है comment करके comment box में जरुर बताए ऐसे ही खबरो के लिए जुङे रहे नीतिपथ से जय हिन्द |
नीतिपथ के लिए पूजा मिश्रा की रिपोर्ट
