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Delhi Weather Update: अक्टूबर में ठंड का एहसास बढ़ेगा

Delhi Weather Update: अक्टूबर में ठंड का एहसास बढ़ेगा

Delhi Weather Update: दिल्लीवासियों को अक्टूबर के मध्य से शीतलता का अनुभव होगा Delhi Weather Update: मॉनसून के जाते ही दिल्ली और एनसीआर के मौसम में बदलाव साफ़ दिखाई देने लगा है। अब हल्की बारिश के साथ उमस और गर्मी का सामना कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के तीसरे हफ्ते से ठंड का अहसास शुरू हो जाएगा। हालांकि मानसून अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन जाते-जाते यह दिल्ली और एनसीआर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश का कारण भी बन रहा है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, 15 से 20 अक्टूबर के बीच दिल्ली के निवासियों को हल्की ठंडक का अनुभव होने लगेगा। इस दौरान सुबह और शाम के तापमान में गिरावट होगी, जिससे लोग स्वेटर पहनने पर मजबूर हो सकते हैं। दिन के समय धूप से गर्मी महसूस हो सकती है, लेकिन सुबह और शाम निश्चित रूप से ठंडक का एहसास देंगे। –Khushi Sharma
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Ratan Tata Death

Ratan Tata की विरासत: टाटा ट्रस्ट में संभावित उत्तराधिकारियों की तलाश

Ratan Tata की मृत्यु: टाटा ट्रस्ट और टाटा ग्रुप के भविष्य पर प्रश्न Tata Group के पूर्व चेयरमैन Ratan Tata का 86 साल की उम्र में बुधवार यानि कल रात को देर रात निधन हो गया। उनके निधन से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अब टाटा ग्रुप की इतनी विरासत कौन संभालेगा, क्योंकि Ratan Tata ने अपना उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं किया था। वर्तमान में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन हैं, लेकिन टाटा ग्रुप की असली ताकत टाटा ट्रस्ट है, जिसे टाटा परिवार के सदस्य ही संभालते रहे हैं। Ratan Tata इस ट्रस्ट के प्रमुख थे, और उनकी मत्यु के बाद यह पद खाली हो गया है। आपको बता दें कि यह ट्रस्ट घर को नमक से लेकर फ्लाईट तक सब कुछ बनाता है । टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास ही टाटा संस की 52% शेयर है। रतन टाटा, टाटा ग्रुप के इतिहास में ऐसे अंतिम व्यक्ति थे, जिन्होंने टाटा ट्रस्ट और टाटा संस दोनों का नेतृत्व किया। हालांकि, कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में 2022 में कुछ बदलाव करते हुए, जिसमें एक ही व्यक्ति को दोनों पदों पर रहने से रोक लगा दी गई थी। Ratan Tata के निधन के बाद टाटा ग्रुप की दिशा पर सवाल यह परिवर्तन गवर्नेंस में सुधार के लिए किया गया था, और इस वजह से टाटा ग्रुप को अब नए नेतृत्व की जरूरत है। रतन टाटा के छोटे भाई जिमी टाटा भी टाटा संस की कंपनियों में शेयरधारक हैं, लेकिन वे 90 के दशक में ही रिटायर हो चुके हैं। जिमी ने रतन की तरह ही शादी नहीं की और वे मुंबई में एक साधारण जीवन व्यतीत कर रहे , वे पिछले 25 वर्षों से व्यवसाय से दूर हैं। रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा अब टाटा ट्रस्ट की विरासत संभालने के सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। नोएल टाटा के तीन बच्चे लिआह, माया और नेविल टाटा भी टाटा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में काम कर रहे हैं। लिआह ने स्पेन से मार्केटिंग में मास्टर डिग्री की है और इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर काम कर रही हैं। माया टाटा कैपिटल में एनालिस्ट के रूप में काम कर रही हैं, जबकि नेविल टाटा ने ट्रेंट में अपनी पेशेवर यात्रा शुरू की है। Ratan Tata की मृत्यु के बाद, टाटा ग्रुप की भविष्य की दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के नेतृत्व में बदलाव की संभावना है, नोएल टाटा और उनके परिवार को टाटा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सबसे संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। –Khushi Sharma
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मुख्यमंत्री आवास विवाद

मुख्यमंत्री आवास विवाद गहराया: केजरीवाल की भूमिका पर उठे सवाल, आतिशी निशाने पर

मुख्यमंत्री आवास विवाद : दिल्ली में मुख्यमंत्री आवास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पहले अरविंद केजरीवाल और अब अतिशी के आवास को लेकर चर्चा तेज है। बुधवार को (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के आवास को सील कर दिया, जो हाल ही में इस्तीफे के बाद अरविंद केजरीवाल द्वारा खाली किया गया था। आतिशी कुछ दिनों पहले अपने समान के साथ उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित इस बंगले में शिफ्ट हुई थीं। आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने यह कार्रवाई की, जबकि विपक्ष का कहना है कि आतिशी को अवैध तरीके से बंगले में शिफ्ट किया गया। आइये आपके विस्तार से बताते है , पुरा मामला आप पार्टी के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री का आवास जबरन खाली कराया गया है। पार्टी का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपराज्यपाल के इशारे पर यह कदम उठाया गया ताकि इस बंगले को भाजपा के किसी नेता को सौप दिया जाए । राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आतिशी को बंगला आवंटित नहीं किया जा रहा और उनका कैंप कार्यालय [यानि उनका पुराना आवास} को भी खाली कराया गया है। मुख्यमंत्री आवास विवाद: आतिशी का बंगला सील, AAP और विपक्ष आमने-सामने” मुख्यमंत्री आवास विवाद : दूसरी ओर, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने इसे अवैध कब्जा करार दिया। उनका कहना है कि आतिशी को पहले से ही सरकारी आवास AB-17 मथुरा रोड आवंटित है, इसके बावजूद वह शीशमहल पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाए हुए हैं। विजेंद्र गुप्ता ने शीशमहल को तुरंत सील करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे विवाद में अरविंद केजरीवाल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री आवास विवाद : आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास विवाद को खाली करने के बाद इसे पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर नहीं किया गया था और आतिशी का सामान वहां पहले से ही पहुंचा दिया गया। यह भी कहा जा रहा है कि बंगला देने की प्रक्रिया को दरकिनार कर के आतिशी को इसमें शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन , एक वीडियो सामने आया जिसमें केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को बंगले की चाबी एक अधिकारी को सौंपते हुए दिखाया गया। लेकिन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का दावा है कि चाबी सौंपने के कुछ समय बाद ही इसे वापस ले लिया गया और बंगला पूरी तरह से हैंडओवर नहीं किया गया था। –Khushi Sharma
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