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one nation one election

भारत में ‘one nation one election’ प्रस्ताव को यूनियन कैबिनेट ने दी मंजूरी

भारत में one nation one election के प्रस्ताव को Union Cabinet ने मंजूरी दे दी है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की रिपोर्ट को हरी झंडी देते हुए, सरकार इसे आने वाले शीतकालीन सत्र में बिल के रूप में पेश कर सकती है। Union Home Minister Amit Shah ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं में से एक बताया था।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे समय और धन की बचत होगी। उनका कहना था कि आचार संहिता लागू होने पर विकास कार्य रुक जाते हैं, इसीलिए यह कदम जरूरी है।विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं। RJD नेता मनोज झा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी राज्य की सरकार गिर जाती है, तो अगले चुनाव तक क्या व्यवस्था होगी? AAP नेता संदीप पाठक ने इसे BJP का नया जुमला बताया, यह कहते हुए कि पार्टी पहले ही कई राज्यों में चुनाव कराने में असमर्थ रही है। Lok Janshakti Party के नेता चिराग पासवान ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया, जिसके द्वारा चुनावी खर्च में कमी आएगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव लोकतंत्र को मजबूत करेगा।समर्थकों का तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से सरकारी खर्चों में भारी कमी आएगी और प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनावों में लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। one nation one election: संसाधन बचत और लोकतंत्र सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन और सभी राज्यों की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसमें 18 संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की गई है, जिनमें से अधिकांश को राज्य विधानसभा की पुष्टि की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन संसदीय अनुमोदन जरूरी है। one nation one election का उद्देश्य संसाधनों की बचत करना, development को बढ़ावा देना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाना है। इस पर आगे की चर्चा और सहमति बनाने की process शुरू की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी राजनीतिक दल और राज्य इस दिशा में आगे बढ़ें। इस विषय पर और अपडेट के लिए बने रहें नितिपथ के साथ। Pooja Mishra
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दिल्ली की राजनीति में नया मोड़: आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना बनीं नई मुख्यमंत्री

आतिशी बनीं दिल्ली की मुख्यमंत्री: AAP के लिए नई चुनौतियों और संभावनाओं का आगाज़

दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता आतिशी मार्लेना को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री चुना गया है। वह 21 सितंबर को अपने कैबिनेट के साथ शपथ लेंगी। इस कैबिनेट में मुकेश अहलावत एक नए चेहरे के रूप में शामिल होंगे, जो सामाजिक न्याय मंत्री राज कुमार आनंद की जगह लेंगे। मुकेश अहलावत दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा सीट से विधायक हैं और AAP के दलित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। दिल्ली सरकार की कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित सात सदस्य होंगे। गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज और इमरान हुसैन मंत्री पद पर बने रहेंगे, जबकि सातवें सदस्य के नाम की घोषणा अभी नहीं की गई है। अरविंद केजरीवाल ने 17 सितंबर को विधायक दल की बैठक में आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव जीता। इसी दिन केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया।आतिशी का जन्म 8 जून 1981 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। उनका राजनीतिक करियर 2013 में AAP से शुरू हुआ, जहां वह मैनिफेस्टो ड्राफ्टिंग कमेटी की सदस्य रहीं। वह 2020 में कालकाजी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं और जीतीं। मार्च 2023 में, मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद, आतिशी को दिल्ली कैबिनेट में शामिल किया गया था, जहां उन्होंने महिला-बाल विकास, शिक्षा, बिजली, कला-संस्कृति, पर्यटन, और PWD मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। दिल्ली की राजनीति में नया अध्याय: आतिशी बनीं AAP का प्रमुख चेहरा, आगामी चुनावों में चुनौतीपूर्ण सफर आतिशी के सामने कई चुनौतियाँ होंगी, क्योंकि वह दिल्ली में AAP की सत्ता को वापस लाने के लिए पार्टी की प्रमुख चेहरा बनेंगी। उनके लिए यह जरूरी है कि वह केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। दिल्ली में अब तक तीन महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं: सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित, और आतिशी। सुषमा स्वराज का कार्यकाल 52 दिन था, जबकि शीला दीक्षित ने तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए 15 साल 25 दिन का कार्यकाल पूरा किया। आतिशी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कहा कि उनके पास अगले चुनाव तक सिर्फ दो लक्ष्य हैं: दिल्ली के लोगों की BJP के षड्यंत्र से रक्षा करना और केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाना। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए पावर न होने की वजह से इस्तीफा दिया। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने शर्त लगाई थी कि वह CM ऑफिस नहीं जाएंगे और किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे। उनके इस्तीफे के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे: कार्यकाल की कमी, ईमानदारी की छवि को मजबूत करना, और भाजपा के दबाव का सामना करना।इस नए राजनीतिक मोड़ के साथ, दिल्ली की राजनीति में एक नई लहर देखने को मिलेगी। आतिशी का मुख्यमंत्री बनना AAP के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर आने वाले विधानसभा चुनावों के नजरीए से।ऐसे ही और खबरों के लिए जुङे रहे नीतिपथ न्युज से जय हिन्द | Pooja Mishra
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अंतरिम सरकार का बड़ा फैसला: बांग्लादेश में सेना को विशेष अधिकार, चुनावी तनाव बढ़ा

बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, जब अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश में सेना को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने का फैसला किया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चुनाव की मांग तेजी से उठ रही है और विरोध प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं। 5 अगस्त को तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है, जिसके कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। मोहम्मद यूनुस ने अगले 60 दिनों के लिए सेना को कानून व्यवस्था बनाए रखने और विध्वंसक गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष अधिकार दिए हैं। इससे अब सेना को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने का अधिकार भी मिल गया है। यह फैसला तब लिया गया जब Bangladesh Nationalist Party (BNP) के हजारों कार्यकर्ता ढाका की सड़कों पर उतरकर चुनाव की मांग कर रहे थे। अंतरिम सरकार का कदम: बांग्लादेश में सेना को विशेष शक्तियां, चुनावी संकट गहरा अंतरिम सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है कि चुनाव कब होंगे, लेकिन विपक्षी दलों ने तीन महीने के अंदर चुनाव कराने की मांग उठाई है। BNP के नेता तारिक रहमान ने कहा कि राजनीतिक स्थिरता केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के जरिए ही संभव है।सरकार का कहना है कि यह कदम देश में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी था, खासकर जब पुलिसकर्मियों की संख्या में कमी देखी जा रही है। गृह सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी ने बताया कि कई पुलिसकर्मी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं, जिसके चलते सेना को मजिस्ट्रेटी शक्ति दी गई है। हालांकि, इस निर्णय पर कुछ experts ने असहमति जताई है। पूर्व सचिव अबू आलम मोहम्मद शाहिद खान ने इसे आवश्यक कदम बताया है, जबकि वकील जेडआई खान पन्ना ने चेतावनी दी कि यह सही नहीं है कि सैन्यकर्मी मजिस्ट्रेट के कर्तव्यों का निर्वहन करें।बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यह कदम एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, जो देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा। Pooja Mishra
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चंद्रबाबू नायडू

चंद्रबाबू नायडू का विवादित आरोप: YSR कांग्रेस के राज में तिरुपति लड्डुओं में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को एक controversial आरोप लगाते हुए कहा कि YSR Congress के शासनकाल में तिरुपति के प्रसिद्ध प्रसाद लड्डुओं में जानवरों की चर्बी का उपयोग किया गया था। यह बयान उन्होंने एनडीए विधायक दल की बैठक में दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने शुद्ध घी की जगह जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया, जिससे तिरुमला मंदिर की पवित्रता को खतरा पहुंचा। चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में YSR Congress पार्टी के नेताओं ने तिरुमला की पवित्रता को कलंकित किया है। उन्होंने ‘अन्नदानम’ की गुणवत्ता से समझौता किया और पवित्र तिरुमला लड्डू को दूषित किया।” उनका आरोप है कि अब उनकी सरकार शुद्ध घी का उपयोग कर रही है और वे तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की पवित्रता की रक्षा करने के लिए प्रयासरत हैं।इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, YSR Congress के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी ने नायडू के आरोपों को खारिज किया और उन्हें दुर्भावनापूर्ण करार दिया। रेड्डी ने कहा कि नायडू ने तिरुमला की पवित्रता और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने नायडू से सवाल किया कि क्या वे अपने परिवार के साथ तिरुमला प्रसाद के संबंध में भगवान के सामने शपथ लेने के लिए तैयार हैं।यह आरोप और उसकी प्रतिक्रिया, आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद पैदा कर सकते हैं, जो पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे ही और खबरों के लिए जुङे रहे नीतिपथ न्युज से जय हिन्द | Pooja Mishra
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हरियाणा चुनाव: कांग्रेस नेता शमशेर सिंह गोगी का विवादित बयान वायरल

हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान करनाल से कांग्रेस नेता शमशेर सिंह गोगी का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने एक controversial बयान दिया है। असंध से कांग्रेस विधायक गोगी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि यदि उनकी सरकार आती है, तो असंध का हिस्सा होगा और वे अपने रिश्तेदारों को खुश करेंगे। उन्होंने कहा, “जो हमारी मदद में आ रहे हैं, जो भाईचारे में आ रहे हैं, हम पहले अपना घर तो भरेंगे ही।” इस बयान के बाद BJP ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं।गोगी ने वायरल वीडियो पर reaction देते हुए कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं और उनका मकसद यह था कि असंध जब जिला बनेगा तो उसे इंडस्ट्रियल हब बनाएंगे, जिससे उनके दोस्तों और रिश्तेदारों का भी भला होगा। उन्होंने नायब सिंह सैनी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें पहले अपना घर बचा लेना चाहिए। इसी बीच, फरीदाबाद एनआईटी से कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा का भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 50 वोट पर उनकी सरकार एक नौकरी देगी। कांग्रेस के इन नेताओं के बयानों ने पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।इस चुनावी माहौल में भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट भी जींद जिले की जुलाना सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। शमशेर सिंह गोगी का विवादास्पद बयान: असंध को इंडस्ट्रियल हब बनाने का वादा हाल ही में, विनेश ने जींद में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के चुनाव चिन्ह की तुलना थप्पड़ से करते हुए कहा, “ताई हाथ का निशान, थप्पड़ का काम करेगा।” उनका यह बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विनेश ने यह कहा कि 5 तारीख को ये थप्पड़ दिल्ली में जाकर लगेगा, और 10 साल में जो अपमान हुआ है, उसका बदला लेना है।विनेश फोगाट, जो ओलंपिक में बिना पदक लौटने के बावजूद देशभर में सहानुभूति का केंद्र बनीं, ने कहा कि वे अपनी पगड़ी और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए चुनावी मैदान में उतरी हैं। उनके मुकाबले में भारत की पहली महिला डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर कविता दलाल और एअर इंडिया के पूर्व कैप्टन योगेश बैरागी भी हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है।हरियाणा के इस चुनाव में कांग्रेस के लिए शमशेर सिंह गोगी और विनेश फोगाट के बयानों ने एक नया विवाद खड़ा किया है। दोनों नेताओं के बयानों और उनकी चुनावी रणनीतियों का आगे क्या असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। ऐसे ही और खबरों के लिए जुङे रहे नीतिपथ न्युज से जय हिन्द | Pooja Mishra
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Kangana ranaut की फिल्म Emergency पर Bombay High Court में सुनवाई, CBFC को 25 सितंबर तक देना होगा फैसला

Bombay High Court में आज kangana ranaut की controversy फिल्म ‘Emergency  के संबंध में सुनवाई हुई। कंगना और जी स्टूडियो ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने CBFC (Central Board of Film Certification)पर आरोप लगाया कि फिल्म को पहले सर्टिफिकेट दिया गया था, लेकिन 6 सितंबर को रिलीज से चार दिन पहले अचानक रोक लगा दी गई।कोर्ट ने CBFC को आदेश दिया है कि वह 25 सितंबर तक फिल्म की सर्टिफिकेशन पर फैसला करे। मामले की अगली सुनवाई भी इसी दिन होगी। सुनवाई के दौरान, CBFC ने नई कमेटी बनाने के लिए कोर्ट से समय मांगा।पिछली सुनवाई 4 सितंबर को हुई थी, जब कोर्ट ने CBFC से 19 सितंबर तक जवाब मांगा था। सिख समुदाय ने फिल्म पर आपत्ति जताई है, उनका आरोप है कि फिल्म में उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है। इस विवाद के चलते विभिन्न राज्यों में याचिकाएं दायर की गई हैं। Bombay High Court में Kangana Ranaut की फिल्म ‘Emergency’ पर सुनवाई: CBFC को 25 सितंबर तक का आदेश याचिका में kangana और फिल्म के निर्माताओं ने आरोप लगाया कि CBFC ने मनमाने ढंग से फिल्म का सर्टिफिकेट रोक रखा है। CBFC के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने बताया कि Emergency के मेकर्स को पहले सिस्टम जनरेटेड ई-मेल मिला था, लेकिन बाद में आपत्ति आने के बाद इसे रोक दिया गया।हाईकोर्ट के जज ने सुनवाई के दौरान CBFC के अधिकारियों को फटकार लगाई और सवाल किया कि कैसे वे बिना फिल्म देखे सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं। कंगना के वकील ने कहा कि वे फिल्म में कोई बदलाव नहीं करेंगे और इसे उसी रूप में रिलीज करेंगे, जिस तरह से CBFC ने इसे पहले मंजूरी दी थी।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी इस मामले की याचिका पहले से दायर थी, जहां जबलपुर सिख संगत ने फिल्म और उसके ट्रेलर पर आपत्ति जताते हुए इसे बैन करने की मांग की थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने CBFC को आपत्तियों पर विचार करने का आदेश दिया था। Bombay High Court ने तुरंत आदेश देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि पहले से ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। कोर्ट ने मेकर्स को सलाह दी कि उन्हें पहले अपनी दलीलें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने रखनी चाहिए थीं।फिल्म Emergency ‘ का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही यह controversy में है। पंजाब में फिल्म के खिलाफ लगातार विरोध protest हो रहे हैं, और ट्रेलर में खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरांवाले के दिखाए जाने के बाद kangana को जान से मारने की धमकियां भी मिल रही हैं। हाल ही में, विक्की थॉमस नामक एक व्यक्ति ने वीडियो जारी कर चेतावनी दी कि यदि जरनैल सिंह को गलत तरीके से पेश किया गया तो कंगना को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।इस controversy फिल्म के भविष्य को लेकर सभी की निगाहें 25 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। ऐसे ही और खबरों के लिए जुङे रहे नीतिपथ न्युज से जय हिन्द | Pooja Mishra
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