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kangana ranaut की फिल्म “emergency” विवादों में, CBFC से मंजूरी की रोक

हाईकोर्ट ने kangana ranaut की ‘इमरजेंसी’ पर रोक लगाई, 6 सितंबर की रिलीज रद्द kangana ranaut अपकमिंग फिल्म “emergency” विवादों में घिर गई है, फिल्म को सेंट्रल बोर्ड का सर्टिफिकेशन (CBFC) से मंजूरी नही मिलनें पर इसकी रिलीज पर रोक लगा दी गई है। कंगना का कहना है , फिल्म को पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से मंजूरी मिल गई थी, लेकिन बाद में सर्टिफिकेशन रोक दी गई । कंगना ने दावा किया है कि यह फैसला उन्हें और सेंसर बोर्ड को मिल रही धमकियों के चलते लिया गया है। धमकियों में मांग की गई है कि फिल्म में इंदिरा गांधी की हत्या, भिंडरावाले, और पंजाब दंगे जैसे विवादित विषय न दिखाए जाएं। मुख्यता फिल्म का विरोध सिख समुदाय की ओर से किया जा रहा है , जिनका आरोप है कि फिल्म में उनकी छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। हाईकोर्ट ने kangana ranaut की फिल्म ‘इमरजेंसी’ की रिलीज पर लगाई रोक, ट्रेलर पर भी बैन की धमकी मध्य प्रदेश के जबलपुर में सिख समुदाय के लोगों ने रैली निकालकर फिल्म पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की।इमरजेंसी फिल्म के लिरिसिस्ट मनोज मुंतशिर ने अपनी प्रतिक्रिया दी उन्होंनें कहा सिख समुदाय से अपील की है कि वे विरोध बंद करें। उन्होंने कहा कि “emergency”फिल्म सिर्फ  kangana ranaut की नहीं है, बल्कि इसमें 500 लोगों की मेहनत लगी है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म के कंटेंट के खिलाफ उठाए गए मुद्दे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। अपनी फिल्म की रोक पर कंगना ने कहा कि धमकियों और दबाव के बावजूद वे अपनी फिल्म को बिना किसी काट-छांट के रिलीज करने के लिए कोर्ट में लड़ेंगी। फिल्म की रिलीज पहले 6 सितंबर को तय थी . आपक बताते चले कि हाल ही में दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में ने कहा कि पंजाब में किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रवी हिंसा फैला रहे थे। वहां रेप और हत्याएं हो रही थीं। जिससें पंजाब के लोगों में रोष और अधिक बढ गया है . – khushi sharma
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AAP

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की गिरफ्तारी: ईडी ने 10 दिन की रिमांड की मांग की

आम आदमी पार्टी Aam Aadmi Party (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान गिरफ्तार, 5 दिन की रिमांड आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने Aam Aadmi Party AAP के विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया, जहाँ एजेंसी ने उनकी 10 दिन की रिमांड की मांग की थी। ईडी ने खान के घर पर सुबह छापा मारा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। विशेष अदालत के न्यायाधीश राकेश स्याल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद देर रात फैसला सुनाते हुए अमानतुल्लाह खान को पांच दिन की रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।  AAP ईडी ने अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया क्यों हुई गिरफ्तारी आखिर क्या है आरोप , अदालत ने कहा कि पैसों से जुडे लेन देन के मामले में आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है, ताकि जमा किए गए सबूतों से आमना-सामना किया जा सके। ईडी ने अदालत को बताया कि तलाशी के दौरान खान से कुछ सवाल पूछे गए थे, लेकिन उन्होंने टालमटोल भरे जवाब दिए, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया। एजेंसी ने दावा किया कि अमानतुल्लाह खान अपराध की आय का उपयोग संपत्ति खरीदने के लिए कर रहे थे और बड़ी मात्रा में नकदी का इस्तेमाल किया गया था .ईडी ने आरोप लगाया कि अमानतुल्लाह खान ने 36 करोड़ रुपये की अवैध आय से जावेद अहमद सिद्दीकी और उनकी पत्नी आयशा को पैसे दिए, जिसमें से 27 करोड़ रुपये नकद थे। इसके अलावा, जीशान हैदर को 12.80 करोड़ रुपये दिए गए, जिसमें से 8.90 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि खान वक्फ बोर्ड में कर्मचारियों की अवैध भर्ती और संपत्तियों को गलत तरीके से पट्टे पर देकर व्यक्तिगत लाभ कमा रहे थे। अमानतुल्लाह खान का कहना है , अमानतुल्लाह खान ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया और कहा कि उन्होंने ईडी के सभी नोटिस का जवाब दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी और केंद्र सरकार उन्हें और उनकी पार्टी को परेशान कर रही है और यह तानाशाही है। खान ने यह भी कहा कि ईडी के छापे के दौरान उनकी सास की तबियत खराब थी, और उन्होंने अधिकारियों से जांच में सहयोग करने के लिए समय मांगा था। आपको बताते चले , सोमवार सुबह ईडी के अधिकारियों ने ओखला में खान के घर पर छापा मारा, लेकिन उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। छह घंटे की कड़ी मशक्कत और तनातनी के बाद, आखिरकार अधिकारियों ने घर में प्रवेश किया और खान को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात थे, और समर्थकों ने जांच एजेंसी और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।अमानतुल्लाह खान को रिमांड पर भेजने का अदालत का आदेश और ईडी की जांच प्रक्रिया यह संकेत देती है कि मामले में और भी कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर जांच जारी है
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Supreme Court

Rapid Increase in Pending Cases in the Supreme Court

जजों की संख्या बढ़ने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मामलों का बढ़ता बैकलॉग   सुप्रीम कोर्ट में लंबित [ pending] मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और अब यह 83,000 के करीब पहुंच गई है। पिछले एक दशक में सुप्रीम कोर्ट में केसों की संख्या में आठ गुना बढ़ोतरी देखी गई है . सुप्रीम कोर्ट में 2009 में जजों की संख्या 26 से बढ़ाकर 31 कर दी गई थी, और 2019 में यह संख्या 34 तक पहुंची। बावजूद इसके, लंबित[ pending] मामलों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आ रही है । आखिर क्या है वजह , जजों की संख्या में वृद्धि के बावजूद पेंडिग मामलों में कमी देखने को नही मिल रही है . सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court )में जजों की संख्या बढ़ने के बावजूद लंबित मामलों में कमी क्यों नहीं? 2009 में जजों की संख्या 26 से बढ़ाकर 31 की गई, लेकिन 2019 में इसे 34 तक बढ़ाने के बावजूद लंबित मामलों में कमी नहीं आई। कोविड-19 महामारी के दौरान न्यायिक कार्यवाही बाधित हो गई थी, जिसके कारण लंबित [ pending] मामलों की संख्या में और भी वृद्धि हुई। महामारी के समय वर्चुअल सुनवाई शुरू की गई थी, लेकिन इससे मामलों का निपटारा उतनी तेजी से नहीं हो पाया जितनी जरूरत थी, जिसके परिणामस्वरूप मामलों की संख्या बढ़कर 65,000 हो गई। इस साल 38,995 नए मामले दायर किए गए, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 37,158 मामलों का निपटारा किया। इसका मतलब है कि जितने मामले निपटाए गए, लगभग उतने ही नए मामले भी दर्ज हुए, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के कार्यकाल में लंबित [ pending] मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और ऐसे मामलों को एक साथ सूचीबद्ध करने के लिए कई इनोवेटिव तकनीकी उपाय किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद लंबित [ pending] मामलों की संख्या में बढ़ोतरी जारी है। आपको बताते चले कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, बल्कि हाई कोर्ट और निचली अदालतों में भी लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक है। 2014 में हाई कोर्ट में 41 लाख मामले लंबित थे, जो अब बढ़कर 59 लाख हो गए हैं। इसी प्रकार, निचली अदालतों में 2014 में 2.6 करोड़ मामले लंबित थे, जो अब बढ़कर 4.5 करोड़ हो गए हैं।
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राजस्थान के Shiksha Mantri का बड़ा बयान अकबर को महान बताने वाली किताबें करेंगे नष्ट

जला देंगे अकबर की तारीफ करने वाली किताबें , ये बयान है राजस्थान के शिक्षा में मंत्री का राजस्थान के Shiksha Mantri मदन दिलावर ने एक नए विवाद को जन्म देते हुए कहा है कि मुगल सम्राट अकबर को राजस्थान के स्कूलों में एक महान व्यक्ति के रूप में नहीं पढ़ाया जाएगा। उदयपुर में 28वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह के दौरान दिलावर ने कहा कि अकबर एक ‘लुटेरा था और उसकी महानता को दर्शाने वाली किताबों को राजस्थान में अब नहीं पढ़ाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि ऐसी सभी किताबों को जला दिया जाएगा, जो अकबर को महान बताती हैं। Shiksha Mantri ने अकबर की तुलना महाराणा प्रताप से करना मेवाड़ और राजस्थान की जनता का अपमान बताया। उन्होंने कहा, “अकबर ने सालों तक देश को लूटा है और ऐसे व्यक्ति को महान कहना मूर्खता है।” उन्होंने आगे कहा कि अकबर को महान बताने वाले इतिहासकारों और पुस्तकों को राजस्थान में स्थान नहीं दिया जाएगा और भविष्य में किसी भी मुगल सम्राट की ‘महान व्यक्तित्व’ के रूप में प्रशंसा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दिलावर ने स्पष्ट किया कि राजस्थान में अब किसी भी स्कूल की किताब में अकबर को महान के रूप में नहीं पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं शपथ लेकर कहता हूं कि आगे से राजस्थान में किसी भी किताब में अकबर को महान रूप में नहीं पढ़ाया जाएगा।” मंत्री ने यह भी कहा कि अकबर जैसे व्यक्ति की महानता का गुणगान करना मेवाड़ और राजस्थान के लोगों के लिए अपमानजनक है। आपको बता हें कि Shiksha Mantri मदन दिलावर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिक्षा में पाठ्यक्रम को लेकर कई राज्यों में बहस चल रही है। उनके इस बयान ने राजस्थान और देश के बाकी हिस्सों में एक नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों का मानना है कि यह बयान इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने जैसा है, जबकि कुछ लोग इसे एक साहसी कदम मानते हैं जो तथाकथित गलत इतिहास को सही करने की दिशा में उठाया गया है। मदन दिलावर पहले भी अकबर को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं, और उनके इस ताजे बयान ने इतिहासकारों और शिक्षाविदों के बीच बहस छेड़ दी है कि क्या इस प्रकार के बदलाव छात्रों के लिए सही दिशा में हैं। राजस्थान में शिक्षा नीति में इस प्रकार के बदलावों का व्यापक प्रभाव हो सकता है और आने वाले समय में यह देखने योग्य होगा कि इस पर किस प्रकार की प्रतिक्रियाएं आती हैं   ~ Khushi Sharma
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PM MODI

PM MODI की ऐतिहासिक ब्रुनेई यात्रा

PM MODI दो दिनों की ब्रुनेई यात्रा पर रवाना हो गए हैं. सुल्तान हाजी हसनल बोलकिया के निमंत्रण पर ब्रुनेई दारुस्सलाम का दौरा कर रहे हैं। यह यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। PM MODI की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। आपको ये भी बताते चले यह यात्रा भारत और ब्रुनेई के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है.क्या जा रहे है , क्या जा रहे है ,PM MODI की यात्रा, 1 . PM MODI की इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। दोनों देशों के नेता इस क्षेत्र में संभावनाओं और आपसी सहयोग पर चर्चा करेंगे, जो भविष्य में तकनीकी साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। 2. द्विपक्षीय व्यापार और निवेश, भारत और ब्रुनेई के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना भी इस यात्रा का एक मुख्य बिंदु है। भारत ने ब्रुनेई के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में 270 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। PM MODI इस यात्रा के दौरान ब्रुनेई के सुल्तान से बातचीत करके इस निवेश को और बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी चर्चा करेंगे। 3. हाइड्रोकार्बन और प्राकृतिक गैस आयात, भारत ब्रुनेई से हाइड्रोकार्बन का आयात करता है और वर्तमान में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इस यात्रा में इस मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भारत की ऊर्जा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके। 4.म्यांमार की स्थिति पर चर्चा, PM MODI और सुल्तान हसनल बोल्किया म्यांमार के हालात पर भी चर्चा करेंगे। म्यांमार की स्थिति दक्षिण पूर्व एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और इस पर चर्चा करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। PM MODI की ब्रुनेई यात्रा के बाद उनका सिंगापुर दौरा होगा, जहां वे सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना है।   ~ Khushi Sharma
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