मुख्यमंत्री आवास विवाद : दिल्ली में मुख्यमंत्री आवास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पहले अरविंद केजरीवाल और अब अतिशी के आवास को लेकर चर्चा तेज है। बुधवार को (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के आवास को सील कर दिया, जो हाल ही में इस्तीफे के बाद अरविंद केजरीवाल द्वारा खाली किया गया था। आतिशी कुछ दिनों पहले अपने समान के साथ उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित इस बंगले में शिफ्ट हुई थीं।
आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने यह कार्रवाई की, जबकि विपक्ष का कहना है कि आतिशी को अवैध तरीके से बंगले में शिफ्ट किया गया। आइये आपके विस्तार से बताते है , पुरा मामला आप पार्टी के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री का आवास जबरन खाली कराया गया है।
पार्टी का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपराज्यपाल के इशारे पर यह कदम उठाया गया ताकि इस बंगले को भाजपा के किसी नेता को सौप दिया जाए । राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आतिशी को बंगला आवंटित नहीं किया जा रहा और उनका कैंप कार्यालय [यानि उनका पुराना आवास} को भी खाली कराया गया है।
मुख्यमंत्री आवास विवाद: आतिशी का बंगला सील, AAP और विपक्ष आमने-सामने”
मुख्यमंत्री आवास विवाद : दूसरी ओर, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने इसे अवैध कब्जा करार दिया। उनका कहना है कि आतिशी को पहले से ही सरकारी आवास AB-17 मथुरा रोड आवंटित है, इसके बावजूद वह शीशमहल पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाए हुए हैं। विजेंद्र गुप्ता ने शीशमहल को तुरंत सील करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे विवाद में अरविंद केजरीवाल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
मुख्यमंत्री आवास विवाद : आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास विवाद को खाली करने के बाद इसे पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर नहीं किया गया था और आतिशी का सामान वहां पहले से ही पहुंचा दिया गया। यह भी कहा जा रहा है कि बंगला देने की प्रक्रिया को दरकिनार कर के आतिशी को इसमें शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन , एक वीडियो सामने आया जिसमें केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को बंगले की चाबी एक अधिकारी को सौंपते हुए दिखाया गया।
लेकिन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का दावा है कि चाबी सौंपने के कुछ समय बाद ही इसे वापस ले लिया गया और बंगला पूरी तरह से हैंडओवर नहीं किया गया था।
–Khushi Sharma
