Article 371 – क्या है आर्टिकल 371 और क्यों ख़फ़ा है लद्दाख की जनता ?

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(Article 371) आर्टिकल 371

चुनावी घोषणा से पहले लद्दाख में गरमाई सियासत (Article 371) आर्टिकल 371 की मांग ,लेह व कारगिल में भूख हड़ताल भी होगी।

(Article 371) आर्टिकल 371 सरकार जहाँ लोकसभा चुनाव की तैयारियो में व्यस्त है. वही दूसरी और लद्दाख की सियासत भी गर्म है. लद्दाख के लोगो ने लद्दाख को राज्य दर्जा देने के लिए संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने जैसे मुद्दे को लेकर माँग की है  जिसमे भाजपा की विरोधी दल की सियासत तेज हो गई है।इन मुद्दों पर गृह मंत्रालय से लद्दाख के संगठनों की दो बार बैठक हो चुकी है लेकिन उन दो बैठकों का कोई फायदा नहीं हुआ. क्युकी अभी तक इसके कोई नतीजा नही निकल पाए है .जिसके वजह से लोग लेह व कारगिल में भूख हड़ताल भी करेंगे और इन संगठनों ने बुधवार को लद्दाख बंद का आह्वान भी किया है। इन मुद्दों को समर्थन देने के लिए लद्दाख के पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और लेह अपेक्स बाडी व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की उप कमेटी के सदस्य भी दिल्ली से लद्दाख पोहचेगे और सोनम वांगचुक भी लेह में आमरण अनशन पर बैठेगे लेकिन चिंता जनक बात ये है की लद्दाख बंद का फैसला ऐसे समय हुआ है. जब भाजपा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार पर फैसला करने की तैयारी में व्यस्त है |

क्या है लद्दाख के लोगो की माँग ?
• लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले |
• संविधान के छठे शेड्यूल को लागू किया जाए।
• लेह और कारगिल को संसद में अलग-अलग सीटें दी जाय |

क्या है लद्दाख का इतिहास ? (Article 371)

लद्दाख पहले जम्मू कश्मीर में ही शामिल था. लेकिन जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को केंद्र सरकार ने साल 2019 में हटा दिया और राज्य को दो केंद्र शासित राज्यों में विभाजित कर दिया। इसमें लद्दाख को अलग केंद्र शासित राज्य बनाया गया। अब इस राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर रहे है। इन लोगों की मांग है की लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए साथ ही संविधान की छठी अनुसूची को लागू किया जाए।

सविंधान की छठी अनुसूची क्या

छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्य शामिल है यह राज्य जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन है। बारदलोई कमिटी की सिफारिशों पर संविधान में इस अनुसूची को जगह दी गई थी |छठी अनुसूची के तहत, जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिले बनाने का प्रावधान है। राज्‍य के भीतर इन जिलों को विधायी, न्यायिक और प्रशासनिक स्‍वायत्‍ता मिलती है।छठी अनुसूची में संविधान के अनुच्छेद 244(2) और अनुच्छेद 275 (1) के तहत विशेष प्रावधान है| हर स्वायत्त जिले में एक ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (ADCs) बनाने का भी प्रावधान है। भूमि, जंगल, जल, कृषि, ग्राम परिषद, स्वास्थ्य, स्वच्छता, ग्राम और नगर स्तर की पुलिसिंग, विरासत, विवाह और तलाक, सामाजिक रीति-रिवाज और खनन आदि से जुड़े कानून, नियम बनाने का हक है।

लद्दाख में छठी अनुसूची से क्या फयदा है ? (Article 371)

संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत छठी अनुसूची आदिवासी आबादी की रक्षा करती है, स्वायत्त विकास परिषदों के निर्माण की अनुमति देती है जो भूमि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि पर कानून बना सकती हैं। यह केवल बाहरी लोगों से लद्दाख की रक्षा करने के बारे में नहीं है। यह लद्दाख को लद्दाखी लोगों से बचाने के लिए है | (Article 371) आर्टिकल 371 )इस 6 अनुसूची न होने से वो भी बहुत नुकसान कर सकते हैं। जैसे कि पैंगोंग झील है, सोमोरीरी झील शामिल है। छठी अनुसूची जो कुछ करती है, वह यह है कि किसी भी एजेंडे में स्थानीय मूल लोगों के परामर्श की आवश्यकता होती है।
तो आपकी क्या राय है इस माँग को लेकर हमे जरूर बताय |

 

-Pooja Mishra

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