जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव, 10 साल बाद गूंजेगा सवाल: अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव तीन चरणों में होंगे: पहले चरण में 24 सीटों पर 18 सितंबर, दूसरे चरण में 26 सीटों पर 25 सितंबर, और तीसरे चरण में 40 सीटों पर 1 अक्टूबर को मतदान होगा। चुनाव के परिणाम 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।इस बार के चुनाव को लेकर जनता और राजनीतिक दलों में उत्साह का माहौल है, लेकिन एक दशक में जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल चुका है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद, इलाके की फिजाओं में बड़ा बदलाव आया है और लोग अब नई उम्मीदों और नजरियों के साथ चुनाव की ओर देख रहे हैं।
मतदाताओं की बदलती उम्मीदें और नई संभावनाएं
जम्मू-कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं की उम्मीदें और अपेक्षाएँ तेजी से बदल रही हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से इलाके में हुए बदलावों का असर स्थानीय लोगों के जीवन पर साफ नजर आ रहा है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से लेकर आधुनिक तकनीकों के उपयोग तक, हर जगह नए बदलाव देखे जा रहे हैं।डल झील के शिकारा मालिकों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है और स्थिति में सुधार हुआ है। शिकारा मालिक इमरान ने बताया कि चुनाव से उन्हें बेहतर कश्मीर की उम्मीद है और डल झील के प्रदूषण को चुनावी मुद्दा बनाने की जरूरत है। वहीं, एक फूल विक्रेता ने पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े बदलावों का जिक्र किया और शिकारा टी स्टॉल के मालिक ने बिक्री में हुए सुधार की खुशी जाहिर की है।उत्तरी कश्मीर का पट्टन, जो कभी आतंक और अशांति का केंद्र था, अब शांतिपूर्ण हो चुका है और चुनाव के लिए तैयार है। यहां के लोग अब सुरक्षा और स्थिरता की ओर आशान्वित हैं। बारामूला के वाघूरा में सेब के बगीचे के पारंपरिक किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें ड्रोन शामिल हैं। यह बदलाव कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का संकेत देता है।
कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास
नवनिर्मित पंडित कॉलोनी में रहने वाले कश्मीरी पंडित, जो पहले विस्थापित हो गए थे, अब पूरे कश्मीर में नई कॉलोनियों में पुनर्वासित किए जा रहे हैं। वे आगामी चुनावों को लेकर उत्साहित हैं और उन्हें डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान का अवसर मिलेगा। कश्मीरी पंडितों ने कहा कि वे अब कश्मीर में सुरक्षित महसूस करते हैं और अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहना चाहते हैं।
2014 के चुनाव परिणाम और वर्तमान स्थिति
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे। उस समय 87 सीटों में से पीडीपी ने 28, बीजेपी ने 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं। बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने थे। उनके निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन गठबंधन जल्द ही टूट गया और राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया। वर्तमान में राष्ट्रपति शासन लागू है।पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया था। अब, एक दशक बाद, जम्मू-कश्मीर के लोग और राजनीतिक दल नई उम्मीदों और चुनौतियों के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की ओर देख रहे हैं।
–Pooja Mishra
