दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता आतिशी मार्लेना को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री चुना गया है। वह 21 सितंबर को अपने कैबिनेट के साथ शपथ लेंगी। इस कैबिनेट में मुकेश अहलावत एक नए चेहरे के रूप में शामिल होंगे, जो सामाजिक न्याय मंत्री राज कुमार आनंद की जगह लेंगे। मुकेश अहलावत दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा सीट से विधायक हैं और AAP के दलित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं।
दिल्ली सरकार की कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित सात सदस्य होंगे। गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज और इमरान हुसैन मंत्री पद पर बने रहेंगे, जबकि सातवें सदस्य के नाम की घोषणा अभी नहीं की गई है। अरविंद केजरीवाल ने 17 सितंबर को विधायक दल की बैठक में आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव जीता। इसी दिन केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया।आतिशी का जन्म 8 जून 1981 को दिल्ली में हुआ।
उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। उनका राजनीतिक करियर 2013 में AAP से शुरू हुआ, जहां वह मैनिफेस्टो ड्राफ्टिंग कमेटी की सदस्य रहीं। वह 2020 में कालकाजी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं और जीतीं। मार्च 2023 में, मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद, आतिशी को दिल्ली कैबिनेट में शामिल किया गया था, जहां उन्होंने महिला-बाल विकास, शिक्षा, बिजली, कला-संस्कृति, पर्यटन, और PWD मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।
दिल्ली की राजनीति में नया अध्याय: आतिशी बनीं AAP का प्रमुख चेहरा, आगामी चुनावों में चुनौतीपूर्ण सफर
आतिशी के सामने कई चुनौतियाँ होंगी, क्योंकि वह दिल्ली में AAP की सत्ता को वापस लाने के लिए पार्टी की प्रमुख चेहरा बनेंगी। उनके लिए यह जरूरी है कि वह केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। दिल्ली में अब तक तीन महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं: सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित, और आतिशी। सुषमा स्वराज का कार्यकाल 52 दिन था, जबकि शीला दीक्षित ने तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए 15 साल 25 दिन का कार्यकाल पूरा किया।
आतिशी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कहा कि उनके पास अगले चुनाव तक सिर्फ दो लक्ष्य हैं: दिल्ली के लोगों की BJP के षड्यंत्र से रक्षा करना और केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाना। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए पावर न होने की वजह से इस्तीफा दिया। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने शर्त लगाई थी कि वह CM ऑफिस नहीं जाएंगे और किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे।
उनके इस्तीफे के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे: कार्यकाल की कमी, ईमानदारी की छवि को मजबूत करना, और भाजपा के दबाव का सामना करना।इस नए राजनीतिक मोड़ के साथ, दिल्ली की राजनीति में एक नई लहर देखने को मिलेगी। आतिशी का मुख्यमंत्री बनना AAP के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर आने वाले विधानसभा चुनावों के नजरीए से।ऐसे ही और खबरों के लिए जुङे रहे नीतिपथ न्युज से जय हिन्द |
Pooja Mishra
