Nitipath

Muhammad Yunus का बड़ा खुलासा

बांग्लादेश में राजनीतिक तख्तापलट: Muhammad Yunus का बड़ा खुलासा और महफूज आलम की अहम भूमिका

बांग्लादेश में हाल के राजनीतिक तख्तापलट को लेकर Muhammad Yunus ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि यह तख्तापलट preplanned था, और महफूज आलम को इस आंदोलन का “मास्टरमाइंड” बताया है। Muhammad Yunus ने यह बयान New York में Clinton Global Initiative Event में दिया, जहां उन्होंने कहा कि यह एक स्वाभाविक जनविद्रोह नहीं था, बल्कि एक सावधानी पूर्वक डिजाइन किया गया आंदोलन था। यूनुस ने महफूज आलम की सराहना करते हुए कहा कि आलम के leadership में युवा प्रदर्शनकारियों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। उन्होंने कहा, “यह जिम्मेदारी है जिसे हम एक साथ लेते हैं। महफूज ने अपने भाषणों और समर्पण से पूरे देश को प्रेरित किया।” Muhammad Yunus का यह भी कहना था कि आंदोलन के पीछे कोई एक नेता नहीं था, बल्कि नेतृत्व में विविधता थी।महफूज आलम के साथ खड़े होकर यूनुस ने कहा, “ये लोग नया बांग्लादेश बना रहे हैं। बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव: Muhammad Yunus ने आंदोलन को बताया सावधानीपूर्वक डिजाइन किया आइए इनकी सफलता की कामना करें।” उन्होंने बताया कि आलम और अन्य युवा नेताओं ने साहसपूर्वक सरकार की हिंसक कार्रवाइयों का सामना किया।यह प्रदर्शन जॉब कोटा को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही यह एक nationwide movement में बदल गया। 5 अगस्त, 2024 को प्रदर्शनकारियों ने पीएम आवास ‘गण भवन’ पर धावा बोल दिया, जिसके परिणामस्वरूप शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। वर्तमान में, हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं। Muhammad Yunus ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ मिलकर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हसीना सरकार की कार्रवाइयों के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन ने युवा वर्ग को प्रेरित किया है और बांग्लादेश में एक नया राजनीतिक परिदृश्य तैयार किया है। ऐसे ही और अपडेट के लिए बने रहें नितिपथ के साथ। धन्यवाद –Pooja Mishra
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अंतरिम सरकार का बड़ा फैसला: बांग्लादेश में सेना को विशेष अधिकार, चुनावी तनाव बढ़ा

बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, जब अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश में सेना को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने का फैसला किया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चुनाव की मांग तेजी से उठ रही है और विरोध प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं। 5 अगस्त को तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है, जिसके कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। मोहम्मद यूनुस ने अगले 60 दिनों के लिए सेना को कानून व्यवस्था बनाए रखने और विध्वंसक गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष अधिकार दिए हैं। इससे अब सेना को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने का अधिकार भी मिल गया है। यह फैसला तब लिया गया जब Bangladesh Nationalist Party (BNP) के हजारों कार्यकर्ता ढाका की सड़कों पर उतरकर चुनाव की मांग कर रहे थे। अंतरिम सरकार का कदम: बांग्लादेश में सेना को विशेष शक्तियां, चुनावी संकट गहरा अंतरिम सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है कि चुनाव कब होंगे, लेकिन विपक्षी दलों ने तीन महीने के अंदर चुनाव कराने की मांग उठाई है। BNP के नेता तारिक रहमान ने कहा कि राजनीतिक स्थिरता केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के जरिए ही संभव है।सरकार का कहना है कि यह कदम देश में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी था, खासकर जब पुलिसकर्मियों की संख्या में कमी देखी जा रही है। गृह सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी ने बताया कि कई पुलिसकर्मी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं, जिसके चलते सेना को मजिस्ट्रेटी शक्ति दी गई है। हालांकि, इस निर्णय पर कुछ experts ने असहमति जताई है। पूर्व सचिव अबू आलम मोहम्मद शाहिद खान ने इसे आवश्यक कदम बताया है, जबकि वकील जेडआई खान पन्ना ने चेतावनी दी कि यह सही नहीं है कि सैन्यकर्मी मजिस्ट्रेट के कर्तव्यों का निर्वहन करें।बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यह कदम एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, जो देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा। Pooja Mishra
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रविशंकर प्रसाद का पलटवार

रविशंकर प्रसाद का पलटवार: ममता बनर्जी पर CAA को लेकर सवाल

बांग्लादेश में पिछले कई दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। बांग्लादेश में रह रहे भारतीयों और पर्यटकों के लिए भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है।वहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शहीदी दिवस कार्यक्रम में यह एलान किया है कि बंगाल का दरवाजा उन सभी के लिए खुला है जो हिंसा में पीड़ित है और बंगाल की सहायता चाहते है हम उनकी मदद जरुर करगें ममता ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के संकल्प का भी हवाला दिया, जिसमें कहा जाता है कि कोई भी पड़ोसी मुल्क शरणार्थियों की रिस्पेक्ट करेगा. ममता ने कहा कि वो बांग्लादेश में हिंसा के मुद्दे पर वह कुछ नहीं कर सकती, क्योंकि यह केंद्र सरकार का काम है – लेकिन वहां के मजबूर लोग अगर आएंगे तो उन्हें वो शरण अवश्य देगी लेकिन  इस बात का विरोध करते हुए बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने ममता पर पलटवार किया है रविशंकर प्रसाद ने कहा, ममता बनर्जी ने कहा है कि बांग्लादेशी शरणार्थियों की वह सहायता अवश्य करेंगी वो अपने दरवाजे खुले रखेंगी और किसी को भी बंगाल में आने देंगी. वो यहां आकर बस सकता है. रविशंकर ने कहा कि आप वही हैं जो CAA के समय कह रही थीं कि अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, पारसी और बौद्ध कैसे रह सकते हैं. और इस कानून का विरोध भी किया था इस खबर को लेकर आपको क्या  comment करके comment box में जरुर बताए ऐसे ही खबरो के लिए जुङे रहे नीतिपथ से जय हिन्द | –Pooja Mishra
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Rohingya Refugees

Rohingya Refugees बांग्लादेश में पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास

Rohingya Refugees बांग्लादेश में पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास बांग्लादेश में Rohingya Refugees के पुनर्वास को लेकर 12 साल के लंबे अंतराल के बाद 2022 में पुनर्वास प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई। अब इस प्रक्रिया में 2023 के दौरान और तेजी देखी जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के बांग्लादेश प्रमुख अब्दुसत्तोर एसोव ने बताया कि अमेरिका ने हजारों Rohingya Refugees को अपने देश में पुनः बसाने की प्रकिया दोहराई है, हालांकि इस प्रक्रिया में अभी और काम जरुरी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुहम्मद यूनुस ने रविवार को दक्षिण एशिया में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के पुनर्वास में तेजी लाने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि यह निर्णय म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही हिंसा को देखते हुए लिया गया है। Rohingya Refugees बांग्लादेश में पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास इस हिंसा के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। म्यांमार में सत्तारूढ़ सेना और बौद्ध बहुसंख्यक जातीय समूह अराकान आर्मी के बीच लड़ाई तेज होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। इस संघर्ष के कारण लगभग आठ हजार रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार की सीमा पार करके बांग्लादेश में शरण लेने के लिए भाग चुके हैं। सीमा पर बढ़ती हिंसा और संकट की स्थिति को देखते हुए Rohingya Refugees का पुनर्वास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता बनता जा रहा है।   ~ Khushi Sharma
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